Sunday, May 19, 2019
तो क्या जयस नेता डॉ हीरा अलावा बीजेपी टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे?

तो क्या जयस नेता डॉ हीरा अलावा बीजेपी टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे?

मीडियावाला.इन।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों कुछ अलग करवट ले रही है। लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए बीजेपी की जगह अब उस के अपने नेता ही मुसीबत का सबब बनते जा रहे हैं। पहले जहां पूर्व मंत्री और लोकसभा में टिकट के दावेदार मुकेश नायक ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया तो अब कांग्रेस के टिकट पर  विधायक चुने गए जय आदिवासी युवा संगठन यानी जयस नेता हीरालाल अलावा ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि उन्हें बीजेपी की तरफ से भी ऑफर आया है। यह चौंकाने वाला खुलासा करते हुए अलावा ने कहा लोकसभा चुनाव को लेकर सभी विकल्प पूरी तरह खुले हुए हैं। अन्य दलों से बातचीत चल रही है। बीजेपी से भी ऑफर आया है। अलावा कहते हैं अभी उनकी टिकट के लिए कांग्रेस से बातचीत चल रही है। अगर कांग्रेस के साथ बातचीत का कोई सकारात्मक निष्कर्ष नहीं निकला तो वह बीजेपी से भी बात आगे बढ़ा सकते हैं। जयस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तय किया गया है जो भी पार्टी विचारधारा को समर्थन करेगी संगठन चुनाव में उसका साथ देगा, चाहे फिर वह बीजेपी ही क्यों ना हो। 
तो, तो क्या अब हीरा अलावा कांग्रेस के कमल का हाथ छोड़ कर बीजेपी के कमल के साथ जुड़ेंगे? यह प्रश्न प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में बड़ी तेजी से उछल रहा है।
 इसी बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ की हीरालाल अलावा से आदिवासी लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों के चयन को लेकर चर्चा हुई है। हीरा अलावा ने अपने संगठन के लिए मध्यप्रदेश की 6 आदिवासी लोकसभा सीटों में से तीन धार, खरगोन और बेतूल सीट के लिए लोकसभा टिकट की मांग की है। उन्होंने साफ कहा है कि अब गेंद कांग्रेस के पाले में है। फैसला कांग्रेस को लेना है ।हमने मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सामने अपनी मांग रखी है।अलावा के बगावती तेवर को देखते हुए ऐसा लगता है कि कहीं ऐसा ना हो कि लोकसभा चुनाव के पहले ही मध्य प्रदेश में नई राजनीति करवट लेने लगे ।
हम यहां बता दें कि मध्य प्रदेश में लोकसभा की कुल 29 में से 6 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित है। प्रदेश के करीब 21 फ़ीसदी आदिवासी आबादी का करीब 50% झाबुआ और निमाड़  इलाके में रहने वाले आदिवासियों का है ,जहां का प्रतिनिधित्व जयस नेता हीरालाल अलावा करते हैं ।उनकी इस इलाके में अच्छी-खासी पैठ है। संगठन का युवाओं में अच्छा खासा प्रभाव है। विधानसभा चुनाव के पहले जयस अपने बल पर उम्मीदवारों को खड़ा कर रहा था लेकिन अंतिम समय में जयस के नेताओं ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया  लेकिन अब जबकि प्रदेश में विधान सभा की आदिवासियों की कुल 47 सीट में 30 सीट पर कांग्रेस आ गई है, लोकसभा चुनाव में जयस  अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है और उसने 6 में से 3 सीटों पर अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। नौबत यहां तक आ गई है कि  अगर यह 3 सीट ना मिली तो लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और जयस के रिश्ते  में दरार पड़ सकती है। लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीति किस दिलचस्प मोड़ पर आ सकती है, यह देखना अभी बाकी है ?

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