Monday, April 22, 2019
बेटे के बाद क्या अब पिता को हरा पाएंगे गुमान सिंह डामोर या बेटे की हार का बदला लेंगे कांतिलाल भूरिया

बेटे के बाद क्या अब पिता को हरा पाएंगे गुमान सिंह डामोर या बेटे की हार का बदला लेंगे कांतिलाल भूरिया

मीडियावाला.इन।

झाबुआ से अमित शर्मा की विशेष रिपोर्ट

झाबुआ: मध्यप्रदेश के झाबुआ- रतलाम संसदीय क्षेत्र में इस बार  रोचक मुकाबला होने वाला है ।इस चुनाव का महत्व इसलिए और ज्यादा बढ़ गया है कि कि भाजपा उम्मीदवार गुमान सिंह डामोर ने  हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के डॉक्टर सुपुत्र विक्रांत को हराया था। अब सौ टके का सवाल यही है कि क्या बेटे के बाद अब पिता को हराकर नया इतिहास रच पाएंगे डामोर ? या कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनुभवी राजनीतिज्ञ कांतिलाल भूरिया क्या अपने बेटे की हार का बदला लेने में सफल हो पाएंगे।

कांतिलाल भूरिया और गुमान सिंह डामोर दोनों का अपना अलग इतिहास है। जहां कांतिलाल भूरिया चार बार लोकसभा का चुनाव इसी सीट से जीत चुके हैं वहीं डामोर प्रदेश के पीएचई विभाग में इंजीनियर इन चीफ पद से रिटायर होने के बाद राजनीति में प्रवेश कर भाजपा में अपनी गहरी पैठ बना चुके हैं।

2014 में जरूर भूरिया को भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह भूरिया के हाथों पराजित होना पड़ा था लेकिन एक साल बाद  दिलीप सिंह की मृत्यु होने के बाद हुए उपचुनाव में कांतिलाल फिर जीतकर संसद में पहुंच गए । भूरिया की क्षेत्र में गहरी पकड़ है। विक्रांत के हारने का एक महत्वपूर्ण कारण यह रहा था कि कांग्रेस के युवा नेता जेवियर मेडा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हो गए थे और वह उनकी हार का कारण बन गए। इस बार मेडा को कांतिलाल ने मना लिया है और इस बात की संभावना है कि मेडा उनके लिए सक्रिय रूप से प्रचार करें। बदले समीकरण में कांतिलाल  को हराना गुमान सिंह डामोर के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी लेकिन डामोर को अगर भाजपा ने टिकट दिया है तो सोच समझ कर ही दिया है। वह भले से राजनीति के अनुभव में कम हो लेकिन रणनीति बनाने में वे किसी से कम नहीं माने जाते हैं और फिर  पूरी भाजपा और आरएसएस उन के पीछे खड़ी है।

इस संसदीय क्षेत्र में आने वाले 8 विधानसभा क्षेत्रों में से केवल दो पर भाजपा और 6 पर कांग्रेस का कब्जा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में झाबुआ के तीन में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा, वहीं रतलाम के 3 में से 2 पर कांग्रेस और एक पर भाजपा और अलीराजपुर की 2 में से 2 पर कांग्रेस का कब्जा है । इस प्रकार कुल 8 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के पास 6 और दो भाजपा के पास है। इस दृष्टि से देखें तो कांतिलाल भूरिया का पलड़ा भारी दिखाई देता है  लेकिन गुमान सिंह डामोर उन्हें अच्छी चुनौती देंगे इसमें कोई शक नहीं।

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