Monday, October 14, 2019
इसरो ने लॉन्च किया GSAT-7A सैटेलाइट, वायुसेना के लिए ऐसे होगा फायदेमंद

इसरो ने लॉन्च किया GSAT-7A सैटेलाइट, वायुसेना के लिए ऐसे होगा फायदेमंद

मीडियावाला.इन। जीसैट-7ए का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है और इसका जीवन 8 साल है. ये भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के यूजर्स को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा


आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इसरो GSAT- 7A सैटेलाइट को लॉन्च कर दिया गया है. इसे पृथ्वी के जियो ऑर्बिट (कक्षा) में स्थापित किया जाएगा. इस सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित हो जाने से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय वायुसेना को होगा.

2,250 किलोग्राम वजनी जीसैट-7ए उपग्रह को लेकर जाने वाला रॉकेट लॉन्चर जीएसएलवी-एफ11 बुधवार शाम चार बजकर 10 मिनट पर श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट के दूसरे लांच पैड से लॉन्च किया गया.

जीसैट-7ए का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है और इसका जीवन 8 साल है. ये भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के यूजर्स को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा.

भारतीय वायुसेना के लिए क्यों खास है GSAT-7A?

इस कम्युनिकेशन सैटेलाइट के जरिए भारतीय वायुसेना अपने सारे रेडार स्टेशनों को आपस में जोड़ सकेगी. इतना ही नहीं इसके जरिए सारे एयरबेस और अवाक्स स्पेसक्राफ्ट भी आपस में आसानी से बातचीत कर सकेंगे. ये अवाक्स विमान हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली का ही हिस्सा होते हैं. अवाक्स को आसमान में आंख भी कहा जाता है. यह 400 वर्गकिमी एरिया में दुश्मन की हरकत पर नज़र रख सकने वाला सिस्टम है.

इतना ही नहीं इस सैटेलाइट के जरिए ड्रोन से जुड़े ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी. यह ऐसे होगा कि जिन ऑपरेशन को वर्तमान में वायुसेना को जमीन से संचालित करना पड़ता है, उन्हें वे सीधे सैटेलाइट से संचालित कर सकेगा.
 

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