Tuesday, October 15, 2019
मोदी कैबिनेट : पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी का नाम तो तय, लेकिन इस बार कौन बनेगा गृहमंत्री?

मोदी कैबिनेट : पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी का नाम तो तय, लेकिन इस बार कौन बनेगा गृहमंत्री?

मीडियावाला.इन। नयी दिल्ली : नरेंद्र मोदी कैबिनेट में नंबर दो का ओहदा किसे हासिल होगा इसकी चर्चा भाजपा की प्रचंड जीत के बाद नहीं बल्कि पहले से ही होती रही है. सामान्यतः गृह मंत्री के पद को प्रधानमंत्री के बाद सबसे पाॅवरफुल पद माना जाता है और इस पद पर बैठे व्यक्ति को नंबर दो की हैसियत हासिल रही है. हालांकि इसमें कुछ अपवाद रहे हैं, फिर भी नंबर दो की हैसियत हासिल व्यक्ति को यह मलाल रहा कि उसे गृह मंत्रालय क्यों नहीं मिला.

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर बड़ा नेता प्रधानमंत्री बनना चाहता है और अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो वह अपने लिए गृहमंत्री के पद का ख्वाब जरूर देखता है. देश के पहले कैबिनेट यानी पंडित नेहरू की सरकार में सरदार वल्लभ भाई पटेल गृहमंत्री थे और वे नेहरू के समानांतर हैसियत रखते थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री थे और बाद के सालों में उन्हें डिप्टी पीएम भी घोषित किया गया.

पटेल और आडवाणी के अलावा सी राजगोपालचारी, गोविंद वल्लभ पंत, लाल बहादुर शास्त्री, चरण सिंह, आर वेंकटरमण, पीवी नरसिंह राव व पी चिदंबरम जैसे बड़े नेता गृहमंत्री रहे हैं. वाजपेयी ने 1996 में जब 14 दिन की सरकार बनायी थी तो उसमें मुरली मनोहर जोशी को गृहमंत्री बनाया था.

2004 में जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए जीत कर सरकार बनाने जा रहा था और यह स्पष्ट हो गया कि सोनिया गांधी नहीं बल्कि डाॅ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनेंगे, तब यह कयास शुरू हुआ कि गृहमंत्री कौन बनेगा. तब प्रणब मुखर्जी को उनकी वरिष्ठता का ध्यान रखते हुए गृहमंत्री बनाने का संकेत हाइकमान की ओर से दिया गया और उन्होंने शपथ ग्रहण के पहले ही इस मंत्रालय से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का अध्ययन आरंभ किया, लेकिन अचानक कांग्रेस हाइकमान का मन बदल गया और यह मंत्रालय शिवराज पाटिल को दे दिया गया. प्रणब दा को प्रधानमंत्री पद नहीं मिलने के बाद यह पद नहीं मिलने का भी मलाल रहा.

हालांकि प्रणब मुखर्जी अपने व्यापक अनुभव, ज्ञान व समझ के कारण मनमोहन सिंह की सरकार में प्रधानमंत्री के बाद सबसे प्रभावी शख्सियत रहे और जब मनमोहन कुछ दिनों के लिए स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर गए थे तो देश का जिम्मेवारी प्रणब को ही सौंपी गयी. यानी प्रणब मुखर्जी एक ऐसे कैबिनेट मंत्री थे जो गृहमंत्री नहीं होते हुए भी नंबर दो की हैसियत प्राप्त थे.

भारतीय राजव्यवस्था में इस बात यूं उल्लेख नहीं है कि प्रधानमंत्री के बाद अमुख मंत्री नंबर दो होगा और यह पीएम के विवेक पर निर्भर करता है. लेकिन, व्यापक कार्य जिम्मेवारी व अधिकार क्षेत्र के कारण गृह मंत्री के पद को ही दूसरा अहम पद माना जाता है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वाजपेयी सरकार में आरंभिक दौर में आडवाणी के गृहमंत्री होने के बाद भी मीडिया के सामने यह बहुत स्पष्ट नहीं था कि नंबर दो की हैसियत में आडवाणी हैं या रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीस. जब घुटने के आॅपरेशन कराने वाजपेयी गए तब यह साफ तौर पर पता चला कि आडवाणी ही नंबर दो की हैसियत में हैं और बाद में उन्हें उप प्रधानमंत्री भी बनाया गया.

मोदी के पहले कैबिनेट में राजनाथ सिंह गृहमंत्री थे और उन्हें औपचारिक रूप से नंबर दो की हैसियत हासिल थी और पीएम के देश के बाहर रहने की स्थिति में कमान उनके हाथ ही होती थी. लेकिन, तब नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद अमित शाह सरकार में शामिल नहीं थे और संगठन की जिम्मेवारी संभाल रहे थे. अब अमित शाह गांधीनगर से लोकसभा के लिए चुन लिए गए हैं और अध्यक्ष पद भी उन्हें छोड़ना होगा, क्योंकि वे अभी चुनाव के लिए विस्तारित अध्यक्ष कार्यकाल का निर्वाह कर रहे हैं.

ऐसे में यह संभावना जतायी जा रही है कि अमित शाह गृहमंत्री बनाए जा सकते हैं. उन्हें गुजरात में मोदी कैबिनेट में गृृह मंत्रालय संभालने का अनुभव भी है. ऐसे में राजनाथ सिंह को कोई अन्य मंत्रालय सौंपा जा सकता है. दूसरी संभावना यह भी जतायी जा रही है कि राजनाथ ंिसंह की वरिष्ठता और सरकार में मोदी के बाद उनकी नंबर दो की हैसियत में कोई बदलाव नहीं होगा और अमित शाह को रक्षा मंत्रालय दिया जा सकता है. बहरहाल, अब यह 30 को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही स्पष्ट होगा कि किसे कौन'-सा पद मिलेगा.

 

 

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