Monday, October 14, 2019
एससी-एसटी में क्रीमी लेयर लागू होगा, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया केंद्र का आग्रह

एससी-एसटी में क्रीमी लेयर लागू होगा, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया केंद्र का आग्रह

मीडियावाला.इन। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि क्रीम लेयर की अवधारणा एससी- एसटी को दिए जाने वाले आरक्षण में लागू होगी। संविधान पीठ ने बुधवार को दिए फैसले में कहा कि संवैधानिक कोर्ट किसी भी क्रीमी लेयर को दिए गए आरक्षण को रद्द करने के लिए सक्षम है। 

पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि नागराज मामले में फैसले के उस हिस्से पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता नहीं है, जिसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये क्रीमी लेयर की कसौटी लागू की थी। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति की अपनी सूची में किसी भी जाति को एससी-एसटी के रूप में शामिल कर सकती है।
ऐसे में उस समूह में क्रीमी लेयर का सिद्धांत बराबरी की कसौटी पर लागू किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का पूरा उद्देश्य यह है कि पिछड़ी जातियां अगड़ों से हाथ में हाथ मिलाकर बराबरी के आधार पर आगे बढ़ें। यह संभव नहीं होगा यदि किसी वर्ग में क्रीमी लेयर सभी प्रमुख सरकारी नौकरियां ले जाए तथा शेष वर्ग को पिछड़ा ही छोड़ दे, जैसा वे हमेशा थे। 

केंद्र के आग्रह को खारिज किया

कोर्ट ने कहा कि जब वह एससी एसटी में क्रीमी लेयर का मामला लागू करता है तो वह अनुच्छेद 341 तथा 342 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी एससी-एसटी की सूची में छेड़छाड़ नहीं करता। इस सूची में जाति और उपजाति पहले की तरह बने रहते हैं। इससे सिर्फ वहीं लोग प्रभावित होते हैं जो क्रीमी लेयर के कारण छुआछूत और पिछड़ेपन से बाहर निकल आए हैं और जिन्हें आरक्षण से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार का यह आग्रह खारिज कर दिया कि एससी-एसटी में क्रीमी लेयर के मामले को खत्म कर दिया जाए। 

2006 के अन्य फैसले का भी उल्लेख किया

कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 14 और 16 की अनुच्छेद 341 तथा 342 के साथ सौहाद्रपूर्ण व्याख्या करते हुए यह साफ है कि संसद को इस बात की पूर्ण आजादी है कि वह किसी समूह को राष्ट्रपति की सूची से संबंधित कारकों पर बाहर और अंदर कर सकती है। पीठ ने 2006 के संविधान पीठ के एक अन्य फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने कहा था कि क्रीमी लेयर सिद्धांत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होता है क्योंकि यह सिद्धांत सिर्फ पिछड़े वर्ग की पहचान करने के लिये हैं और समानता के सिद्धांत के रूप में लागू नहीं होता है। 
 

हिंदुस्तान से साभार

 

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