Saturday, September 21, 2019
Chandrayaan-2: जानिए, लैंडर 'विक्रम' से संपर्क साधने के लिए कौन से तरीके अपना रहा है ISRO

Chandrayaan-2: जानिए, लैंडर 'विक्रम' से संपर्क साधने के लिए कौन से तरीके अपना रहा है ISRO

मीडियावाला.इन।                                   चेन्नई. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बताया कि चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर ने लैंडर 'विक्रम' (Lander Vikram) की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया है. अब इसरो की टीम लगातार सिग्‍नल भेजकर लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की लगातार कोशिश कर रही है. दरअसल, इसरो को वह फ्रिक्वेंसी पता है, जिस पर विक्रम से कम्युनिकेट किया जाना है. ऐसे में टीम इस उम्मीद के साथ लगातार अलग-अलग कमांड भेज रही है कि विक्रम किसी का तो जवाब देगा. हम आपको बता रहे हैं विक्रम से संपर्क के लिए कौन से तरीके अपनाए जा रहे हैं:

कर्नाटक के गांव बयालालु में लगाए एंटीना से किया जा रहा संपर्क
विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल कर रहा है. इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरु में है. इसरो कोशिश कर रहा है कि ऑर्बिटर के जरिये विक्रम से संपर्क किया जा सके. दरअसल, विक्रम में तीन ट्रांसपांडर्स और एक तरफ एरे एंटीना (Array Antenna) लगा है. इसके ऊपर एक गुंबद के आकार का यंत्र लगाया गया है. विक्रम इन्हीं उपकरणों का इस्तेमाल कर पृथ्वी या इसके ऑर्बिटर से सिग्नल लेगा और फिर उनका जवाब देगा.                                    

 

विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल कर रहा है.

इसरो 14 दिन तक जारी रख सकता है संपर्क की कोशिश.                                                       लैंडर पावर जेनरेट कर रहा है या नहीं इस बारे में कोई स्‍पष्‍टता नहीं है. यह भी हो सकता है कि हार्ड लैंडिंग के कारण इसके कुछ उपकरण टूट गए हों, लेकिन जैसा इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि वे अभी भी उसके डाटा का एनालिसिस कर रहे हैं. इसरो के प्री-लॉन्च अनुमान के मुताबिक, विक्रम को सिर्फ एक लुनर डे के लिए ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी. इसका मतलब है कि 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिलेगी. ऐसे में इसरो इन 14 दिन तक अपनी कोशिश जारी रख सकता है.

उपकरण क्षतिग्रस्‍त होने पर कोशिशें रोक सकता है इसरो
इसरो को अगर जानकारी मिल जाए कि इसके कम्युनिकेशन इक्विपमेंट क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तो 14 दिने से पहले भी संपर्क की कोशिश खत्म कर सकता है. 14 दिन के बाद एक लंबी काली रात होगी. अगर लैंडर ने सॉफ्ट लैंडिंग की होती तो भी इस अंधेरी रात में बचे रह पाना उसके लिए मुश्किल होता. इसरो चीफ ने कहा कि चांद के चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर में एक्स्ट्रा फ्यूल है, जिससे उसकी लाइफ साढ़े सात साल तक हो सकती है. ऑर्बिटर हाई रिजॉल्यूशन की तस्वीरें भेजेगा, जिससे चंद्रमा के रहस्य समझने में मदद मिलेगी.                                                                                 72 घंटे से ज्‍यादा बीतने के बाद भी विक्रम ने नहीं दी प्रतिक्रिया                                               विक्रम ने ग्राउंड स्टेशन से संपर्क टूटने के बाद 72 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि, इसरो ने अभी तक अधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी है कि संपर्क के लिए लगाए गए विक्रम के उपकरण सही सलामत हैं या नहीं. इन उपकरणों को काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत भी होगी. विक्रम की बाहरी बॉडी पर सोलर पैनल लगा है. अगर विक्रम ने तय योजना के मुताबिक लैंडिंग की होगी तो यह सूरज से ऊर्जा लेकर पावर जेनरेट कर लेगा. इसके अलावा विक्रम में बैटरी सिस्टम भी है.                                                         Source : "News18"

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