Wednesday, October 16, 2019
देश में अल्पसंख्यकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात

देश में अल्पसंख्यकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात

मीडियावाला.इन।

देश में अल्पसंख्यक की नई परिभाषा तय करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकर्ता से पेटिशन की कॉपी अटॉर्नी जनरल को देने को कहा। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल से सुझाव मांगे, अब इस केस में चार हफ्ते बाद सुनवाई होगी। यह याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने अल्पसंख्यक आयोग को 17 नवंबर 2017 को ज्ञापन दिया था और मांग की थी कि पांच समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित करने की 1993 की अधिसूचना रद्द की जाए।

इसके साथ ही अल्पसंख्यक की परिभाषा और पहचान तय करने के साथ साथ जिन राज्यों में हिन्दुओं की संख्या बहुत कम है वहां हिन्दुओं को अल्पसंख्यक घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को 3 महीने के भीतर उस ज्ञापन पर फैसला लेने को कहा था। उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कोर्ट से अल्पसंख्यक की परिभाषा और पहचान तय करने की मांग की थी। भारत के संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत उन लोगों के लिए कुछ अलग से प्रावधान किया गया है जो भाषा और धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं, लेकिन 'अल्पसंख्यक' की सटीक व्याख्या और परिभाषा नहीं होने की वजह से इसका बड़े स्तर पर दुरुपयोग हो रहा है।

2011 के जनसंख्या आकड़ों के मुताबिक देश के आठ राज्यों लक्ष्यद्वीप, मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब में हिन्दू अल्संख्यक हैं, लेकिन उनके अल्पसंख्यक के अधिकार बहुसंख्यकों को मिल रहे हैं। इसी तरह लक्ष्यद्वीप, जम्मू कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक हैं जबकि असम, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में में भी उनकी ठीक संख्या है, लेकिन वे वहां अल्पसंख्यक दर्जे का लाभ ले रहे हैं। मिजोरम, मेघालय, नगालैंड में ईसाई बहुसंख्यक हैं जबकि अरुणाचल प्रदेश, गोवा, केरल, मणिपुर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल मे भी ईसाइयों की संख्या अच्छी है इसके बावजूद वे अल्पसंख्यक माने जाते हैं। पंजाब मे सिख बहुसंख्यक हैं और दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में भी सिखों की अच्छी संख्या है लेकिन वे अल्पसंख्यक माने जाते हैं।

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