Saturday, October 19, 2019
सत्तापक्ष ने किया बहिष्कार, अफसर ने पेश किया निगम का बजट

सत्तापक्ष ने किया बहिष्कार, अफसर ने पेश किया निगम का बजट

मीडियावाला.इन।

रायपुर। तीन जुलाई 2019, नगर निगम के 101 साल के इतिहास में ऐसी तारीख के रूप में दर्ज हुई है, जो याद रहेगी। वह इसलिए क्योंकि पहली बार सत्तापक्ष ने सदन की पूरी कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। बजट सत्र था। महापौर प्रमोद दुबे को बजट पेश करना था, उनका अभिभाषण होता। मगर वे सदन से गैरमौजूद रहे।

उनकी अनुपस्थिति में सभापति प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए वित्त विभाग के उपायुक्त एसपी साहू को बजट रखने को कहा। साहू ने निर्देशों का पालन किया। मगर इसे न पढ़ा गया, न ही इस पर चर्चा की गई। विपक्ष ने एक सुर में कह दिया कि वह इसे अस्वीकार करता है। सभापति इसके बाद एजेडों पर चर्चा करते हुए सदन की कार्यवाही की घोषणा कर दी।

यह निगम के लिए किसी दुखद घटना से कम नहीं था। जानकारों का मानना है कि चाहे जो भी हो जाए, कितनी भी विपरीत परिस्थितियां ही क्यों न हों, सदन के मुखिया यानी महापौर को सदन को छोड़कर जाना नहीं चाहिए।

इससे पहले सभापति ने सदन में कीचड़ फेंकने वाले भाजपा पार्षद मनोज प्रजापति और डायस में चढ़कर हंगामा करने वाले एमआइसी सदस्य ऐजाज ढेबर को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया। मगर यह महापौर के कार्यकाल का आखिरी बजट था। शहर की 14 लाख आबादी की निगाहें इस पर टिकी हुई थीं।

मगर जो हुआ उसकी किसी को अपेक्षा नहीं थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह निर्णय कांग्रेस के लिए भविष्य में बड़ा नुकसान कर सकता है। 'नईदुनिया' ने इस घटनाक्रम पर महापौर से संपर्क किया, मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

कांग्रेस में फूट के संकेत-

कांग्रेस के कुछ एमआइसी सदस्य, पार्षद सदन की कार्यवाही में शामिल होना चाहते थे। इनका मानना था कि कार्यवाही के बहिष्कार से जनता में गलत संदेश जाएगा। यह भविष्य के लिए घातक हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक सोमवार की दोपहर जब महापौर, अपने पार्षदों के साथ सदन से गए तो जिला अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल के साथ बैठक हुई। जानकारी के मुताबिक पार्टी ने कार्यवाही में शामिल न होने के आदेश दिए थे।

10 बजे सभापति ने की थी महापौर और नेताप्रतिपक्ष के साथ बैठक- सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए सभापति ने महापौर, नेताप्रतिपक्ष के साथ बुधवार की सुबह 10 बजे अपने कक्ष में बैठक की थी। इस पर कोई ठोस सहमति नहीं बनी।

पार्टी लाइन के खिलाफ संचेतक

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत काली मंदिर के पास स्थित दुकानों के वाणिज्जिक क्षेत्र से बाहर होने के कारण शासन के दिशा-निर्देश के अनुसार 50 फीसद तक छूट देने, किराया कम किए जाने का प्रकरण रखा गया। इस पर विपक्ष सहमत था, मगर इनके ही पार्षद आशीष अग्रवाल ने इसका विरोध कर दिया। जबकि वे संचेतक हैं। उन्हें दल के निर्णय से सबको सहमत, अवगत करवाना है।सामान्य सभा से कांग्रेस के बहिष्कार पर पार्षदों ने क्या कहा-

- सामान्य सभा में न जाने का निर्णय पार्टी का था, जो सर्वमान्य था। इससे ज्यादा मैं कुछ और नहीं कह सकता। - सतीष जैन, पार्षद, सदर बाजार वार्ड

 

- यह आखिरी सामान्य सभा थी। हम पार्षदों की अपेक्षाएं थीं कि हम जनता की बातें सदन में रखते, सत्तापक्ष से सवाल पूछते। अब हम जनता को क्या जवाब देंगे? महापौर को अगर सदन में नहीं आना था तो एक दिन पहले ही कह देते। - मीनल चौबे, पार्षद, दीनदयाल उपाध्याय वार्ड

- अगर सभापति पहले ही दिन कीचड़ फेंकने वाले पार्षद पर कार्रवाई कर देते तो हम वॉक आउट नहीं करते। सभापति, लगे ही नहीं सभापति हैं। वे पार्टीगत हो गए हैं। अगर ऐसी स्थिति बनती है तो सदन कैसे चलेगा। - अजीत कुकरेजा, एमआइसी सदस्य

 

- आप भाजपा के पार्षद पर कार्रवाई नहीं करते, कहते हो की शिकायत करें। यह गलत है। कांग्रेस गलत परंपरा को बर्दाश्त नहीं करेगी। इसलिए हम सबने सदन में न आने का फैसला लिया था । - सतनाम सिंह पनाग, एमआइसी सदस्य

चाहे परिस्थितियां जो भी हों, सत्तापक्ष के नेता को सदन नहीं छोड़ना चाहिए। विपक्ष का तो अधिकार है सवाल पूछना, यानी आप सवालों से भाग रहे हैं। जब सभापति ने कार्रवाई कर दी, तब तो आना चाहिए था। -रमेश सिंह ठाकुर, उप नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम

 

मेरे पास बजट पेश करवाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था, यह नियमों के तहत किया गया, जिसे विपक्ष ने स्वीकार नहीं किया। महापौर का सदन में उपस्थित न होना, गैर जिम्मेदाराना था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। - प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सभापति, नगर निगम

विपक्ष हर मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार था, इसलिए तो उपस्थित हुआ। न आकर महापौर ने जनता का अपमान किया है। इसके लिए जनता माफ नहीं करने वाली। जो बजट रखा गया, वह आंकड़ों का माया जाल है।-सूर्यकांत राठौर, नेताप्रतिपक्ष, नगर निगम

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सदन की कार्यवाही के दौरान कौन कहां थे-

महापौर- महापौर प्रमोद दुबे मुख्यमंत्री निवास में चल रही भेंट-मुलाकात में सीएम के साथ थे।

कांग्रेस पार्षद- कुछ निगम मुख्यालय में महापौर के केबिन में बैठे थे, कुछ आए। जो केबिन में थे वे महापौर के निर्देश का इंतजार कर रहे थे।

विपक्ष- विपक्ष के सभी सदस्य सदन में मौजूद थे।

यह भी जानें-

1.10 लाख रुपये- एक दिन की कार्रवाई का खर्च, यानी दो दिन में करीब 2.20 लाख रुपये खर्च हुए। इसमें बिजली का बिल, सभी पार्षदों और अफसरों के चाय, नाश्ते और भोजन का बिल। पेट्रोल का खर्च भी शामिल है। शहर के बड़े अफसर निगम में मौजूद रहते हैं, इससे काम-काज भी प्रभावित होता है।

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