Wednesday, November 14, 2018
इंदौर जिले में अपराधिक गतिविधियों में संलग्न 10 आरोपी रासुका में निरूद्ध 

इंदौर जिले में अपराधिक गतिविधियों में संलग्न 10 आरोपी रासुका में निरूद्ध 

मीडियावाला.इन। इंदौर : इंदौर जिले में आगामी त्यौहार एवं निर्वाचन के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री निशांत वरवड़े ने बड़ी कार्यवाही करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत 10 आरोपियों को रासुका में निरूद्ध करने के आदेश जारी किये है। जिले में अपराधिक गतिविधियों में लगातार संलग्न आरोपियों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की सिलसिला लगातार जारी हैं।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री निशांत वरवड़े द्वारा इस संबंध में जारी आदेशानुसार जिन आरोपियों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून अंतर्गत निरूद्ध किया गया है, उनमें यादव नंद नगर निवासी लक्की उर्फ प्रदीप पिता सुरेश यादव, पारसी मोहल्ला निवासी शुभम सिलाव पिता अरूण सिलावट, मसानिया रोड यादव नगर, आजाद नगर निवासी लकी उर्फ उदय सिंह पिता रमेश चंद्र मालवीय, बम्बई बाजार हाल निवासी केशव नगर धार रोड चंदन नगर निवासी सलीम उर्फ काणा पिता मोहम्मद ईशाक, भागीरथपुरा निवासी राहुल उर्फ सुनील उर्फ लेंडी पिता प्रकाश माली, राधाकृष्ण नगर नंद बाग निवासी सुंदरम् उर्फ छोटू पिता अवधेश दीक्षित, ऋषि नगर निवासी जितेन्द्र सिंह ठाकुर उर्फ जीतू पिता लाखन सिंह कुशवाह, भवानी नगर निवासी महेश उर्फ लंगडा पिता रमेश उर्फ बाबूलाल प्रजापत, भावना नगर निवासी राजेश उर्फ भय्यू पिता कालू राम तथा छोटी खजरानी निवासी गोविंद पिता बाबूलाल शामिल हैं।

उक्त सभी रासुका बंदियों का गंभीर अपराधिक रिकॉर्ड हैं। यह सभी लगातार अपराधिक घटनाओं में संलग्न रहें हैं। उक्त सभी लोक व्यवस्था भंग करने के भी आदि हैं। इनके विरूद्ध अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या करने, अवैध हथियार रखने, डरा-धमका कर रंगदारी करते हुए वसूली करने, जहरीली शराब बेचने, चाकूबाजी करने, अश्लील गाली देने, जान से मारने की धमकी देने, हफ्ता वसूली करने जैसे अनेक गंभीर अपराध पंजीबद्ध हैं। इनके विरूद्ध समय-समय पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी की गई। परंतु इनकी गतिविधियों में कोई सुधार नहीं आया। इनके कृत्यों से आमजन के जीवन को परेशानी हो रही थी तथा लोक शांति एवं लोक व्यवस्था भंग होने का खतरा उत्पन्न हो गया था। आगामी दिनों में त्यौहारों एवं निर्वाचन के दौरान भी लोक शांति एवं लोक व्यवस्था भंग होने का खतरा था।

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