Friday, September 20, 2019
प्रदेश में हो रहे एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार कड़े कदम उठाएं -हीरालाल त्रिवेदी 

प्रदेश में हो रहे एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार कड़े कदम उठाएं -हीरालाल त्रिवेदी 

मीडियावाला.इन। भोपाल। सपाक्स पार्टी के  अध्यक्ष  हीरालाल त्रिवेदी ने कहा है कि एमपी में आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने एवं एट्रोसिटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने हेतु सपाक्स पार्टी द्वारा 18 फरवरी को विधानसभा सत्र के पहले दिन भोपाल में बड़ी रैली आयोजित की जा रही है।श्री त्रिवेदी ने कहा कि संसद द्वारा संविधान संशोधन कर सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण लागू किया गया है। सपाक्स पार्टी जातिगत आधार पर आरक्षण का विरोध करती है, अपितु मप्र में  कानून बनाकर सभी वर्गों में  इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग करती है।

मध्य प्रदेश में भी उक्त संविधान संशोधन के अनुसार कानून बनाकर सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने का कानून इस संशोधन के साथ लागू किया जाए कि सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार के जो बिंदु निर्धारित किए गए हैं, वे अनुसूचित जाति - जनजाति सहित सभी वर्गों के मामलों में भी लागू होंगे।इसके साथ यह संशोधन भी किया जाए जिसे एक बार आरक्षण मिल गया है उसे दोबारा आरक्षण नहीं मिलेगा। प्रदेश में पदोन्नति आरक्षण नियम 2002 तुरंत निरस्त किया जाए तथा सभी अधिकारियों कर्मचारियों को समान रूप से पदोन्नत किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार के आने के बाद एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग में भारी वृद्धि हुई है। अभी हाल ही में चुरहट सीधी में पदस्थ डॉक्टर शिवम मिश्रा द्वारा प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली गई। इसी प्रकार अशोक नगर में भी श्री अरविंद यादव द्वारा इस एक्ट के दुरूपयोग की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की गई। हमारी मांग है कि इन परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए तथा इस परिवार के एक सदस्य को शासकीय सेवा में योग्यता के अनुरूप नौकरी दी जाए ताकि इन दोनों परिवारों का भरण-पोषण हो सके। इसके अतिरिक्त भी एट्रोसिटी एक्ट के  दुरुपयोग के रोज कई मामले सामने आ रहे हैं। भोपाल में श्री संजय कुमार भार्गव के विरुद्ध अंबाह मुरैना के विधायक श्री कमलेश गौर जाटव द्वारा अपने मकान के अवैध  निर्माण की शिकायत करने पर अपने रिश्तेदार के माध्यम से एट्रोसिटी एक्ट में प्रकरण दर्ज कराया है। हाल ही में मैनिट के डायरेक्टर श्री रघुवंशी के खिलाफ भी एट्रोसिटी एक्ट का प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसी प्रकार उज्जैन में भी है एक कार्यपालन यंत्री के विरुद्ध एक उपयंत्री ने इसी प्रकार का मामला दर्ज कराया है।  अब स्थिति यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सुपरविज़न या समीक्षा के दौरान यदि मातहत को कोई नोटिस दे दिया जाता है या कोई कार्रवाई कर दी जाती है और अगर वह व्यक्ति एससी एसटी वर्ग का है तब अधिकांशतः संभावना बन जाती है कि उस अधिकारी के विरुद्ध एट्रोसिटी एक्ट का दुरुपयोग करते हुए प्रकरण दर्ज करवा दिया जाए।  पुलिस की मजबूरी है कि यदि वो अपराध दर्ज नहीं करते हैं तब उन्हें के विरुद्ध अपराध दर्ज होने का प्रावधान है। 

उक्त स्थिति देखते हुए हमारी मांग है कि मध्यप्रदेश में इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए तुरंत कठोर कदम उठाए जाएं तथा जो भी दुरुपयोग करें उसके विरुद्ध प्राथमिकता से कठोर कार्रवाई की जाए।

हमारी मांग है कि मध्य प्रदेश विधानसभा एक संकल्प पारित कर भारत की संसद को भेजें कि एट्रोसिटी एक्ट में 2016 एवं 2018 में जो संशोधन किए गए हैं उससे भारतीय समाज के बहुसंख्यक वर्ग के लोग इस एक्ट के दुरुपयोग की प्रताड़ना से पीड़ित हैं, अतः 2016 के संशोधन में जो साधारण अपराध जोड़े हैं तथा 2018 के संशोधन में जो अग्रिम जमानत का प्रावधान समाप्त किया गया है ये दोनों संशोधन तुरंत प्रभाव से वापस लिए जाए।

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