Sunday, October 20, 2019
मध्य प्रदेश:महापौर- पालिका अध्यक्ष का चुनाव अब पार्षद करेंगे

मध्य प्रदेश:महापौर- पालिका अध्यक्ष का चुनाव अब पार्षद करेंगे

मीडियावाला.इन।

भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में अब महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के द्वारा किया जाएगा। अब तक यह चुनाव जनता के द्वारा सीधा किया जाता था। इस बारे में राज्य सरकार के द्वारा भेजे गए अध्यादेश को राज्यपाल द्वारा मंजूरी दे दी गई है।

प्रदेश सरकार की ओर से राज्यपाल को मंजूरी के लिए एक अध्यादेश भेजा गया था, जिसमें महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जनता के बजाए वार्ड पार्षदों से कराने का प्रावधान किया गया था। सरकार की ओर से यह अध्यादेश भेजे जाने के तत्काल बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजभवन जाकर राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की थी। उन्होंने सरकार द्वारा भेजे गए इस अध्यादेश पर भाजपा की ओर से आपत्ति ले ली थी । इसके पूर्व भी भाजपा के नेताओं के द्वारा राज्यपाल के समक्ष ज्ञापन भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी गई थी । भाजपा का कहना था कि संविधान संशोधन में जो प्रावधान किया गया है। उसके मान से इन दोनों उच्च पदों पर जनता के द्वारा सीधे अपने प्रतिनिधि का निर्वाचन करने की प्रक्रिया मध्यप्रदेश में चल रही है इस प्रक्रिया को बंद करना उचित नहीं है।

भाजपा द्वारा ली गई आपत्ति के बीच राज्यपाल लालजी टंडन के द्वारा इस अध्यादेश को होल्ड पर रख दिया गया था। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई वैसे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ राजभवन जाकर राज्यपाल से मिले और उन्होंने राज्य सरकार के रुख को स्पष्ट किया था इसके बाद से सभी नजरें राजभवन पर टिकी हुई थी।
आज राज्यपाल के द्वारा इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। अब यह साफ हो गया है कि मध्यप्रदेश में महापौर के चुनाव सीधे न कराकर पार्षदों के जरिये होगा| राज्यपाल लालजी टंडन ने मंगलवार सुबह महापौर निर्वाचन अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इससे पहले इस प्रस्ताव को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई थी। बीजेपी का मानना है कि महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही हो, कांग्रेस को हार का डर है इसलिए यह फैसला लिया गया है|

अब मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से न होकर अप्रत्यक्ष रूप से होगा। पहले जनता पार्षद के साथ ही महापौर का भी चयन करती थी। नए अध्यादेश के तहत अब जनता पार्षद को चुनेगी और पार्षद ही अपनी पसंद का महापौर चुनेंगे। इससे पहले सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव से सम्बंधित दो अध्यादेशों को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा था| राज्यपाल ने एक अध्यादेश को मंजूरी देकर अन्य महापौर चुनाव बिल को रोक लिया था| इसके बाद कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने ट्वीट कर राज्यपाल को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी| उनके इस ट्वीट के बाद ऐसा माना जा रहा था कि राज्यपाल इससे नाराज हैं|.                                                     

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