Thursday, October 24, 2019
मेधा पाटकर के अनशन का सातवां दिन, अनशन त्यागने की अपील करने सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे बड़वानी कलेक्टर और S.P.

मेधा पाटकर के अनशन का सातवां दिन, अनशन त्यागने की अपील करने सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे बड़वानी कलेक्टर और S.P.

मीडियावाला.इन।

बडवानी:  नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर जी के द्वारा नर्मदा चुनौती अनिश्चितकालीन सत्याग्रह, नर्मदा किनारे छोटा बड़दा में सातवे दिन भी जारी रहा | मेधा पाटकर जी पिछले 25 अगस्त से बिना पुनर्वास सरदार सरोवर बांध में 192 गांव और एक नगर को डूबाने की केंद्र और गुजरात सरकार की जिद के खिलाफ अनशन किया जा रहा है जबकि घाटी में आज 32,000 परिवार निवासरत है। ऐसी स्थिति में बांध में 138.68 मीटर पानी भरने से 192 गांव और 1 नगर  की जल हत्या होगी | 

 

बांध में पानी का लेवल 134 मीटर से उपर पहुँच चूका है और केंद्र और गुजरात सरकार द्वारा लगातार 32,000 परिवारों को अनदेखा किया जा रहा है। नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथियों द्वारा लगातार अनिश्चितकालीन अनशन जारी है लेकिन सरकार के द्वारा कोई भी जवाब नहीं दिया जा रहा है |

आज सुबह बडवानी कलेक्टर अमित तोमर और बडवानी S.P. द्वारा अनशन स्थल पर पहुँच कर अनशन खत्म करने तथा स्वास्थ्य परीक्षण की अपील की गई लेकिन सत्याग्रहियों का साफ़ कहना था पहले पानी का लेवल कम किया जाये और पुनर्वास की व्यवस्था किया जाये उसके बाद ही बांध में 138.68 मीटर तक पानी भरा जाये | इस पर बडवानी कलेक्टर द्वारा कोई भी जवाब नहीं दिया गया |

 

नर्मदा चुनौती सत्याग्रह के समर्थन में देश भर से समर्थन मिल रहा है । मध्यप्रदेश सोशलिस्ट पार्टी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर बिना पुनर्वास डूब की निंदा की तथा  बांध के गेट खोलने की मांग की | राजस्थान के शुक्लावास में अनशन के समर्थन में धरना किया गया | तमिलनाडू के चेन्नई में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, तथा पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया |

अनशन स्थल पर पहुंचे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता चिन्मय मिश्र ने भी नर्मदा चुनौती अनशन को समर्थन दिया और बिना पुनर्वास डूब के खिलाफ केंद्र और गुजरात सरकार को भी बांध में बिना पुनर्वास 32,000 परिवारों को अनदेखा किया जा रहा है , और राज्य की सरकार को भी मौन रहने पर सवाल खड़ा किया | 

 

आज भी नर्मदा घाटी में 32,000 परिवार निवासरत है | आज की मध्यप्रदेश सरकार ने हमारी बात तो सुनी पर 08 महीनों में पुनर्वास का काम आगे नहीं बढ़ा | पूर्व सरकार ने जो जो गडबडी कोई उसकी सच्चाई सामने लाकर गुजरात और केंद्र सरकार से बांध के गेट खुलवाना चाहिए और पुनर्वास का काम तत्काल करना चाहिए |  

ऐसे ही हर बांध में गांव गांव की हत्या होती रही क्योंकि विकास की आवधारणा ही गलत है | ऐसी स्थति में क्या मध्यप्रदेश सरकार अपने लोगों को बिना पुनर्वास डूबने से रोक पायेगी ?

हजारों परिवारों का सम्पूर्ण पुनर्वास भी मध्य प्रदेश में अधूरा है, पुनर्वास स्थलों पर नीति आनुसार सुविधाएँ नही है । ऐसे में विस्थापित अपने मूल गाँव में खेती, आजीविका डूबते देख संघर्ष कर रहे हैं | ऐसे में आज की मध्य प्रदेश सरकार लोगो का साथ नही छोड़ सकती,  ऐसा हमारा विश्वास है।

 

नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार 6000 परिवार और 76 गाँव ही नहीं, काफी अधिक संख्या में (करीबन 32000 परिवार) निवासरत है। जीने का अधिकार न पाये दुकानदार, छोटे उद्योग, कारीगरी, केवट, कुम्हार तो डूब लाकर क्या इन गांवों की हत्या करने दे सकते है?

 

जलस्तर में वृद्धि सत्याहग्रहियों को धमकाने का प्रयास

 

गुजरात सरकार सत्याग्रहियों तथा डूब क्षेत्र के प्रभावितों को धमकाने के लिए सरदार सरोवर के गेट से पर्याप्त निकासी नहीं कर रही है जिससे जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। निधारित जलभराव कार्यक्रम के विरुद्ध जलस्तर बढ़ा कर आज 134.500 मीटर कर दिया गया है। लेकिन, सत्याग्रही डूब से पहले हर परिवार के संपूर्ण पुनर्वास की मांग पर अडिग हैं।

 

बांध के दुष्पूरिणाम दिखाई देने लगे हैं

 

पिछले पखावड़े से नर्मदा घाटी के साकड़-हरिबड़ क्षेत्र में लगातार भूकम्प के झटके आ रहे हैं। अब भूकंप की तीवृता और प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। जलाशय में पानी रुकने से जलजनित और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां तेजी से फैल रही है। स्थानीय अस्पतालों के रिकार्ड के अनुसार ओपीडी मरीजों की संख्या 3 गुना बढ़ गई है। साथ ही जलाशय का जल प्रदूषित होने से आज छोटा बड़दा में कई मछलियां मरी हुई दिखाई दी।

 

 

पुनर्वास संबंधी इन मुद्दों पर कार्य बहुत धीमी गति से आगे बढ़ा है। आज तुरंत सही प्रक्रिया अपनाना जरुरी है क्योंकि पिछले 15 सालों में काफी गड़बड़ी, धांधली, झूठी रिपोर्ट और भ्रष्टाचार ही चला है। आज भी दुर्भाग्य  से भ्रष्टाचारियों को रोका नहीं गया है। पूर्व शासन द्वारा सर्वोच्च या उच्च अदालत में प्रस्तुत याचिकाएँ वापस करने के आश्वासनों की पूर्ति आज तक नहीं हुई है ।

 

नर्मदा बचाओ आंदोलन के समर्थक साथी भी लगातार आंदोलन के साथ भागीदारी निभा रहे है आज (NAPM) की साथी सुनीति सुलभा रघुनाथ, सुहास कोल्हेकर (पुणे, महाराष्ट्र), डॉ. सुनीलम (किसान संघर्ष समिति ,NAPM), राजेश बैरागी, लीलाधर चौधरी (किसान संघर्ष समिति), शिल्पा बल्लाल, सुनील सुकठनकर (पुणे महाराष्ट्र) गीतांजली बहन (नासिक, महाराष्ट्र) शान्तनु (दिल्ली फोरम), चिन्मय मिश्र, सरोज मिश्र (इंदौर), कैलाश लिम्बोदिया (माकपा), रामनारायण कुरडीया(अखिल भारतीय किसान सभा) साथी भी सत्याग्रह में मौजूद रहे |

नर्मदा ट्रिब्यूनल और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत डूब के पहले सम्पूर्ण पुनर्वास हो, यह सुनिश्चित करना, प्रभावितों का हक़ भी है और सरकार की कानूनी ज़िम्मेदारी है".

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