Wednesday, October 16, 2019
चुनावी ड्यूटी से हटाये गए अधिकारियों के नाम पर्यवेक्षक के लिए भेजे

चुनावी ड्यूटी से हटाये गए अधिकारियों के नाम पर्यवेक्षक के लिए भेजे

मीडियावाला.इन।

भोपाल। जिन अफसरों को लोकसभा और विधानसभा चुनाव में चुनाव ड्यूटी से शिकवा-शिकायतों के चलते हटाया गया था, उनका नाम केंद्रीय निर्वाचन पर्यवेक्षक बनाने के लिए भेजा गया है। इसमें रतलाम के तत्कालीन कलेक्टर राजीव चंद्र दुबे, राजगढ़ की पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद और सिवनी के पुलिस अधीक्षक विवेकराज सिंह शामिल हैं।

इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी अजय श्रीवास्तव सहित कुछ कमिश्नर और कलेक्टरों के नाम भी चुनाव आयोग को भेजे गए हैं। सबसे चौंकाने की बात यह है कि सूची में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के दो संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल और अरुण कुमार तोमर के नाम भी शामिल हैं। इस मुद्दे को लेकर सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अजय दुबे ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।

मध्यप्रदेश शासन की ओर से केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाने के लिए जो नाम चुनाव आयोग को भेजे गए हैें, उसे तैयार करने में स्थापित मापदंडों को ताक पर रखा गया है। राजीव दुबे को रतलाम से 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की शिकायत पर हटाया गया था।

इसी तरह राजगढ़ पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद को लेकर भी कांग्रेस ने ही शिकायत की थी। सामान्य तौर पर चुनाव ड्यूटी से जिस अधिकारी को हटाया जाता है, उन्हें दोबारा यह दायित्व नहीं सौंपा जाता है। पर्यवेक्षक के ऊपर निष्पक्षता से चुनाव कराने का दारोमदार रहता है। ऐसे में जो नाम भेजे गए हैं वे सवाल खड़े करते हैं।

उज्जैन कमिश्नर अजीत कुमार, रीवा कमिश्नर अशोक कुमार भार्गव और जबलपुर कमिश्नर राजेश बहुगुणा, छिंदवाड़ा कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा और शहडोल कलेक्टर ललित दाहिमा के नाम भी सूची में हैं। इनके ऊपर चुनाव कराने की सीधी जिम्मेदारी है।

वहीं, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थ संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल और अरुण कुमार तोमर के नाम भी पर्यवेक्षक के लिए प्रस्तावित सूची में हैं। जबकि इनके ऊपर चुनाव संचालन की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि इन्हें पर्यवेक्षक बनाया जाता है तो चुनाव आयोग को नए अधिकारी तैनात कराने होंगे।पर्यवेक्षकों की सूची पर उठे सवाल को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का कहना है कि सूची में किसका नाम शामिल करना है, यह हमारा नहीं शासन का काम है। वैसे चुनाव ड्यूटी से हटाए गए अधिकारी को पर्यवेक्षक नहीं बनाने को लेकर कोई प्रावधान नहीं है।नईदुनिया से साभार 

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