Monday, March 25, 2019
एक जवान की आखिरी कविता

एक जवान की आखिरी कविता

यदि मैं रणक्षेत्र में खेत रहूँ,
और ताबूत को जब घर भेजें
तो मेरे सीने पर मैडल जरूर सजे हों,
माँ को यह बताएं
कि मैं आखिरी दम तक लड़ा,
मातृभूमि को अपने जीवन का
सर्वश्रेष्ठ अर्पित किया है।

पापा को कहना
उन्हें झुकने-टूटने की जरूरत नहीं,
अब वे मेरी तरफ से निश्चिंत रहें
हमेशा के लिए,

और हाँ भाई से इतना जरूर कहिएगा
कि वह खूब मन लगाकर पढ़े,
मेरे बाइक की चाभी अब उसी की है,

बहन से कहना
कि वह घबराए नहीं
उसका भाई गोधूलि बेला के साथ
गहन निद्रा में चला गया है,

और अंत में
मेरे देश से कहिए
कि अब रोने-चिल्लाने की जरूरत नहीं,
क्योंकि मैं एक फौजी
पैदा ही शहीद होने के लिए हुआ हूँ!

माँ.. तेरा वैभव अमर रहे
हम दिन चार रहें न रहें !!

0 comments      

Add Comment