Sunday, April 21, 2019
हर रोज खुलते हैं दोनों देशों के बीच दोस्ती के दरवाजे

हर रोज खुलते हैं दोनों देशों के बीच दोस्ती के दरवाजे

मीडियावाला.इन।

कमान पोस्ट, उड़ी (कश्मीर)।

ये देश का उत्तरी कोना है। देश की सरहद यहीं से शुरु होती है। भारतीय कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर को बांटनेवाली नियंत्रण रेखा जब यहां से गुजरती है तो तीन ओर खड़ी पहाड़ियां पाकिस्तान का हिस्सा हैं। और उससे घिरी है भारत की सबसे महत्वपूर्ण कमान पोस्ट। भारत का गांव उडूसा और पाकिस्तान के गांव पहल को अलग करती है लाइन ऑफ कंट्रोल।

सुबह 7 बजे जब देश के इस छोर तक जाने को श्रीनगर से कूच किया तो डल झील पर अंधेरे का कब्जा था। कोहरा लालचौक पर पहरा दे रहा था। पट्‌टन, सोपोर जैसे घोर आतंकवादी इलाकों को पीछे छोड़ हम बारामुला में कदम रख चुके थे। श्रीनगर से 100 किमी का रास्ता तय कर हम उड़ी पहुंच गए। यहां कालापत्थर ब्रिगेड के टीसीपी पर पहली चेकिंग हुई। तीन और जगह रिपोर्ट करने के बाद हम कमान पोस्ट पर थे। ये पोस्ट 1956 में बनाया गया था। तब इसके कमांडिंग ऑफिसर थे लेफ्टिनेंट कर्नल कमान सिंह पठानियां।

2005 से पहले इस कमान पोस्ट और सामने पाकिस्तान के बीच झेलम बहती थी। फिर दोनों ओर के कश्मीर को जोड़ने के लिए यहां एक पुल बनाया गया। यही नहीं पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच कारवां ए अमन बस की शुरुआत भी हुई। फिर 2008 में दोनों ओर से ट्रकों में भरकर सामान भी आने लगा। लेकिन खास बात ये कि अब तक इस सरहदों के बीच व्यापार सामान के बदले सामान भेजकर होता है। ट्रेडर्स एसोसिएशन के मेंबर के मुताबिक इस व्यापार में पैसों को लाया गया तो हवाला कारोबार का खतरा है। यही वजह है कि सलालाबाद-चिकोटी पर आज भी दोनों देश 21 सामान की अदला बदली करते हैं।

उड़ी से 18 किमी का पहाड़ों से घिरा रास्ता आपको ठीक कमान पोस्ट ले जाएगा। ये रास्ता कहीं ओर नहीं मुड़ता। 2005 में जब दोनों देशों के बीच ये पुल बना तब तक दोनों ओर बोर्ड लगे थे – आप दुश्मन की नजर में हैं। आज वहां पहुंचते ही पहली नजर उस पार पाकिस्तान में लगे साइन बोर्ड पर जाती है। उस पर लिखा है — “…पाकिस्तान से रिश्ता क्या, ला इलाहा इलल लाह।” यानी आपका रिश्ता पाकिस्तान से मुसलमान होने का है। वहीं कुछ कदमों की दूरी पर पाकिस्तानी सरहद में अलामा इकबाल के फोटो के साथ एक दूसरा पोस्टर लगा है। लिखा है — “एक हो मुस्लिम हरम की पासबानी के लिए, नील के साहिल से लेकर ताबका के काशगर।” यानी मुसलमान एक हो जाए अपने श्राइन की सुरक्षा के लिए। भारतीय इलाके में इसका जवाब देते हुए बस एक पोस्टर लगा है। लिखा है — “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर में रखना।” यानी मजहब आपस में लड़ाई करना नहीं सिखाता।

जब भी दोस्ती की बात आती है तो भारत पहल करता है। यही वजह है कि जब भी किसी पर्व या त्योहार पर दोनों देश यहां से एक दूसरे को मिठाईयां देते हैं तो भारत पाकिस्तान से कुछ किलो ज्यादा ही मिठास पाक भेजता है।

हर सोमवार यहां से यात्रियों की बस इस पार से उस पार आती जाती है। जबिक मंगलवार से शुक्रवार तक सामान से भरे ट्रक। हर दिन 60 यात्रियों को दोनों ओर से भेजने की अनुमति है। जबकि एक दिन में 25 ट्रक सामान भेजा जा सकता है। इस साल 21 दिसंबर तक पीओके से भारत आए लोगों की संख्या 928 रही जबकि भारत से वहां गए यात्री 224 थे। परमिट के काम से जुड़े बशीर अहमद के मुताबिक हम साल में तीन बार आने-जाने का परमिट देते हैंं। पीओके के लोग तीनों बार का इस्तेमाल करते हैं। जबकि भारतीय एक बार जाकर आ जाते हैं। उनके दो चांस जाया चले जाते हंै। इस परमिट पर 28 दिन सीमा पार रहने की परमिशन होती है। उसे 15 दिन के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। परमिट उसे ही दिया जाता है जो जम्मू कश्मीर या फिर पाक अधिकृत कश्मीर का नागरिक हो। साथ ही ये भी जरूरी है कि उसका कोई रिश्तेदार सीमा पार होना चाहिए। पीओके गए भारतीय को मुज्फ्फराबाद तक जाने दिया जाता है। जबकि भारत आए पीओके के नागरिक को जम्मू से आगे जाने की अनुमति नहीं होती।

सबसे खास यहां से होनेवाला ट्रेड है। भारत की ओर से ज्यादातर केले, फल और मसाले जाते हैं। जबकि पीओके से ड्रायफ्रूट्स और कारपेट आते हैं।

कस्टम से जुड़े अधिकारी के मुताबिक उनका काम काफी ज्यादा होता है क्योंकि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते। वो भारतीय सीमा में बने फेसिलिटेशन सेंटर के कांच पर इशारा कर कहते हैं, “ये गोली देखी है 2011 में पाकिस्तान ने फायरिंग की थी, उसी का निशान है।” अभी 2014 में 83 करोड़ रुपए की नारकोटिक्स पाकिस्तानी ट्रक में पकड़ी गई थी। जब भारतीय सेना और पुलिस ने ट्रक डाइवर को गिरफ्तार कर लिया तो पाकिस्तान ने वहां गए सभी भारतीय ड्राइ‌वरों को बंधक बना लिया। बकी मशक्कत और फ्लैग मीटिंग के बाद मामला सुलझा।

भारतीय सीमा में बने सेंटर में पार जानेवाले यात्रियों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। एक प्रेयर रूम है, वॉश रूम और कुछ सिटिंग स्पेस भी। हाल ही में एक रिफ्रेशमेंट काउंटर भी शुरु हुआ है। जिसकी कहानी थोड़ी अलग है। अगस्त 2015 में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती और तब कश्मीर में सेना के कोर कमांडर ले.जन साहा कमान पोस्ट आए थे। उन दोनों की बातचीत में ये निकलकर आया की यहां एक रेस्तरां बनना चाहिए। मुफ्ती ने इसके आदेश दिए। जब पीडब्ल्यूडी की टीम वहां जगह देखने पहुंची तब तक सेना ये रिफ्रेशमेंट काउंटर बना चुकी थी।[न्यूज़ बंकर ब्लॉग से साभार ]

 

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उपमिता वाजपेयी

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर स्त्री शक्ति पुरस्कार एवं राष्ट्रीय लाडली मिडिया अवार्ड से सम्मानित युवा पत्रकार उपमिता वाजपेयी इंदौर की है। वे फौज से जुडी स्पेशल रिपोर्टिंग के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। इसी रिपोर्टिंग पर केन्द्रित उनक ब्लॉग न्यूज़ बंकर बहुत ही लोकप्रिय है। पत्रकार, ब्लोगर, ट्रेवलर उपमिता को शहादत, शौर्य और अदम्य साहस से लैस सिपाहियों के हौंसले का हिस्सा बनने की जिद ने बेसाख्ता सेना से जोड़ दिया। अब उनके दिमाग में पत्रकारिता रहती है, दिल में धड़कन की तरह सेना बसी है..वे सतत फौज, आतंकवाद, फौजी परिवार और उनके संघर्षों पर लिख रही है। 

सम्प्रति : वे भास्कर भोपाल में विशेष प्रतिनिधि है।