Wednesday, July 17, 2019
लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

मीडियावाला.इन।क्या मेरी तरह आपको भी बचपन की  फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता की याद आती है ,कभी हम गांधी बनते थे , और कभी विवेकानन्द ,एक बार जब मैं आठवीं में थी तब मैं एक भटकी आत्मा बनी थी। काला बुरके जैसा ड्रेस ,बाल खुले ,सफ़ेद मेकअप ,और सब बिजली बंद करवा कर फिर स्टेज पर एक पुरानी डरावनी फिल्म का म्यूजिक ,घुंघरू की आवाज और एक जलती मोमबत्ती हाथ मे लेकर स्टेज पर एक ख़ास तरह का केटवाक भूत स्टाइल में ------फिर गूंजती आवाज में अपना परिचय मैं एक आत्मा हूँ ,परमात्मा की खीज में भटक रही हूँ ,फैंसी ड्रेस आयोजन समिति की टीचर मेरे पक्ष मे थी उन्होंने उस प्रस्तुति को आखरी रखा ,यह समझाते हुए कि भूल जाओ फ़स्ट इम्प्रेशन इस लास्ट इम्प्रेशन ,जमाना बदल गया है अब  लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन का जमाना है ,लास्ट प्रस्तुति लोगो के दिलो दिमाग में ताजा रहेगी वे उसको ओरा में घर जायेंगे । उसी के बारे मे उसी की मनोदशा मे रहेंगे -------------------------खूब तालियाँ --और एक दम नया आइडिया होने से पुरस्कार  तो मिलना ही था -----
                                   -बचपना सदा बना रहे .ना उम्र की सीमा हो ना पद ,ना प्रतिष्ठा की ,हम मनुष्य है -इच्छाधारी, हमारी इच्छा अगर तितली की है ,या लंगूर बनने की ,हम नाग नाथ बने या भेड़िया ,हमें बनने दिया जाना चाहिए ,स्कूल ही क्यों ऑफिस में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता क्यूँ नहीं हो सकती और ऑफिस ही क्यों कहीं भी रखी जा सकती है -यह हमें नए चरित्र में प्रवेश दिलाती है और किराये के ड्रेस सब जगह मिल ही जाते है .कुछ बड़े लोग आजकल किराये के या पुराने कपडे बेचने का बिजनेस भी करते देखे गए है .मुनाफे का धंधा .आज सोचती हूँ अभिनेता होती तो सब तरह के रोल, सब तरह की ड्रेस ,सब खुबसूरत जगहों पर मैं भी यात्रा करती .इच्छाओं को मारने का दुःख नहीं होता ,थोड़ी देर ही सही एक जीवन जीने को मिलता ,कभी किसान या किसान के पत्नी , कभी गाय चराती ,कभी बंसी बजाती ,कबी गडरिया ,कभी मालिक कभी नौकर ,कभी रखवाला कभे चोर ,कभी  पुलिस [चोर पुलिस का एक खेल और याद आया जो बचपन में खेलते थे ]कभी में नर्मदा की परिक्रमा करती कभी गंगा की सफाई ,पुण्य का पुण्य और लगे हाथ पाप भी धो आती |पाप और पुण्य सब एक साथ करने को मिल जाते |अगले जन्म के लिए यह नहीं कहना पड़ता की हे भगवान् अगले जन्म मोहे बिटिया ना किजो .कभी मैं मालवी होने का दावा नहीं कर पाती मैं एक राष्ट्रभक्त के रूप  में अपनी इमेज बनाती [कौशिः श ] ,जैसा देश होता वैसा भेस बना लेती .पर एक पारिवारिक इमेज पर ही मेरी सुई अटक गयी ,परिवार की धूरी बना दी गई ,सारी निष्ठाएं परिवार में ही केन्द्रित हो गई ,मैं कुछ नहीं बन पायी ,बोर हो गई  मोनोटोनस पहचान से .कुछ नया नहीं .यहाँ चाहो तो भी ध्यान नहीं लगा सकते ,याद आया एक बार एक अपनी सहेली के कहने पर श्री श्री के प्रशिक्षण मे चली गई ,आर्ट ऑफ़ लिविंग वहां सुबह के आठ बज गए थे समापन  के पूर्व गुरुजी ने कहा आँखे और कान बंद कर लीजिये अब आपको कोई आवाज नहीं सुनाई देगी मन शांत करिए .,मेरा मन वहां से चुप चाप भाग निकला ,मुझे बच्चे की स्कुल बस कीआवाज और हार्न सुनाई देने लगा ,बबलू  का टिफिन ध्यान योग मे बनाया ही नहीं अब क्या देंगे पति देव ?गुस्से से लाल पीले अलग होंगे .याद आया आज सोमवार उन्हें ९ बजे मीटिंग में जाना होता है नाशता ?मिनती की टेस्ट है त्रेमासिक नंबर जुड़ते है रिजल्ट में ,जाते जाते टिप्स कौन देगा .हे भगवान ये ध्यान क्लास  कब ख़त्म होगी ?जाऊं बात बिगड़े उसके पहले कुछ समाधान निकाल लूँ ,रास्ते से अपना स्वीट्स के यहाँ से गर्म बेद्मी पूरी सब्जजी  ही  ले जाऊं टिफिन ,नाशता सब एक लाठी से ही निपटने जैसा लगा ,जैसे ही ओम  शांति से ध्यान क्लास पूर्ण हुई मैं भागी , कल से अपना घर ही अपना घ्यान केंद्र रहेगा .इतना मानसिक तनाव वहां शान्ति की खोज मे झेला उससे तोज्यादा ही  घर के काम के साथ ही मेडिटेशन कर लेती हूँ एकाग्रता एक जगह अपने घर पर ही केन्द्रित रहती है ,हाँ वोट तो मुझे भी चाहिए होते थे ,पति की प्रशंसा ,बच्चों की मुस्कुराहाट ,नाशते की तारीफ,,मिल जाय तो ठीक  नहीं तो कल नयी कौशिश करने की संभावना रहती ,घर घर है हर पल कभी जीतते तो कभी हारते ,पर हर पल कुछ  नया ,घर कोई सरकार तो है नहीं पांच साल वाली ? नींद खुल गई है चाय के लिए पति आवाज दे रहे है ,
 अरे कब  तक  सोती रहोगी ,
अरे तो उठाया क्यों नहीं ?मैंने हडबडाकर कर कहा 
सोते हुए देख कर लगा तुम कितनी ध्यानस्थ हो कर सो रही हो ,लगा केमरा निकाल कर कुछ फोटो खिंच ही लूँ .पति ने कहा |
पर फिर मन नेकहा   ध्यानस्थ व्यक्ति की फोटो ध्यान में बाधा उत्पन्न कर सकती है ,यह ठीक नहीं .पर अब उठो ध्यान ज्ञान से बाहर आओ मेरी चाय वाली बीबी . 
लो सपने में मैं फैनसी ड्रेस से  श्री श्री तक घूम आई -अब  चूल्हे पर चाय की केतली  पांच मिनिट बाद मैं नेता -अभिनेता .आध्यात्म ,फैशन सब से बाहर आ गयी |
लीजिये जनाब चाय ,चायवाली हाजिर है चाय गर्म चाय .
तभी खबर आई आज काम वाली नहीं आ रही हैवोट डालने जायेगी ,अभी अभी वाट्सअप पर मेसेज और स्याही के निशान वाली मुझे उंगली बताती फोटो भेजी है उसने .मैं वाट्स अप को कोस रही हूँ ,बर्तनों मे विम् बार मलते हुए .मैं कब जाउंगी वोट डालने .गृहस्थी से ध्यान हटा कर ?  क्या जीवन है मेरा घर घर और घर .छोड़ छाड़ देती तो ही अच्छा होता ,जहाँ चाहती जाती .जब तक मन होता ध्यानस्थ सोती .कोई चाय चाय करके उठाता तो नहीं ?ये पति समझते क्या है पत्नी को ?एक फोटो तो खींची नहीं मेरी ?बड़े आये मेरे रखवाले ?मैं भी कौन  कम हूँ ,आँखे बंद कर खुद ही सेल्फी ले चुकी हूँ ,मैं कौन  सच में सो  रही थी ,एक्टिंग करना मुझे भी आती है .ये तो केवल ट्रेलर था ,अभी पूरा एपिसोड बाकी है ------{mediawala फीचर डेस्क ]--------  फोटो गूगल   से साभार 

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