इंदौर लेखिका संघ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चित्र आधारित लेखन कार्यशाला सुप्रसिद्ध एतिहासिक उपन्यासकार डॉ शरद पगारे को समर्पित

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इंदौर लेखिका संघ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चित्र आधारित लेखन कार्यशाला सुप्रसिद्ध एतिहासिक उपन्यासकार डॉ शरद पगारे को समर्पित

                  मेवाड़ की हाड़ी रानी को केंद्र में रख कर लिखी गई रचनाये

अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में इंदौर लेखिका संघ द्वारा मनाये जा रहे पखवाड़े के तहत  विभीन्न विषयों पर लेखन कार्यशालाए आयोजित की जा रही हैं .इंदौर लेखिका संघ की संस्थापक अध्यक्ष डॉ स्वाति तिवारी ने बताया कि इस शृंखला में प्रतिदिन अलग अलग विषय दिए जाकर लेखन कौशल को निखारा जा रहा है .त्वरित लेखन और शब्द कोष में इस तरह के प्रशिक्षण से वृद्धि होती हैं .सभी सदस्य इस कार्यशाला में  भागीदारी करते हैं और समीक्षात्मक प्रतिक्रियाएं सुधार करवाने में सहायक होती है .कार्यशाला में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चित्र आधारित लेखन के लिए एतिहासिक नारी पात्र ‘मेवाड़ की हाड़ी रानी’विषय दिया गया था . एतिहासिक लेखन कार्यशाला में  हिंदी भाषा के गद्य पद्य विधा में बड़ी संख्या में लेखिकाओं ने ओज ,समर्पण ,वीरांगना ,कटार जैसे शब्द  प्रतीकात्मक रूप से दिए गए थे . इस कार्यशाला को इंदौर के ख्यात एतिहासिक  विषयों के उपन्यासकार व्यास सम्मान से सम्मनित साहित्यकार डॉ शरद पगारे को समर्पित किया गया .

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कार्यशाला डॉ शरद पगारे के एतिहासिक  महिला पात्रो को स्मरण कर शुरू की गई .सर्वप्रथम मधु सोनी मधुकुंज ने प्रदत्त विषय पर मुक्तक ..कटार को जो हैं परखते,उस अंगुष्ठ धार पर ..चरित्र सत्य हे अटल ना दंभ कर तलवार पर …लिख कर विषय में प्रवेश करवाया . वरिष्ठ लेखिका वंदिता जी श्रीवास्तव ने ..सिंहनी की शक्ति धारण कर ..अपना शीश कटार से .अत्यंत कम शब्दों में हाइकू के माध्यम से रानी की  पूरी कथा कही .नवोदित  लेखिका स्मिता लोनकर  स्मिता लोकर जी ने ..ब्याह हुआ रतन सिंह चुड़ावत से …विदा हुई पिता के घर से ..’रानी के विवाह का दृश्य शब्दों में बांधा .वरिष्ठ कवियत्री सुषमा शुक्ला ने  पांच मुक्तक के रूप में ओजपूर्ण शब्दावली में ..राजपूती शान की ज्योति .. हाड़ा रानी की निशानी थी । राजपुताना स्त्री के पराक्रम को वर्णित किया .लेखिका प्रभा तिवारी ने हाड़ी रानी पर मौलिक जीवन वृत्त उकेरते हुए    राजसी वैभव के साथ बलिदान नारी के समर्पण के हर रूप पर दृष्टी डाली .डॉ विम्मी मनोज ने क्षत्राणी का साहस …वह कर्तव्य को केद्र में रखते हुए कविता रची .

कार्यशाला के दूसरे  सत्र में डॉ शशिकला अवस्थी जी ने कर्तव्य धर्म ही सदा प्रथम  सुंदर रचना लिखी । डॉ निशि मंजवानी ने रानी तो क्षत्राणि .. रण की हर धर्म अधूरा स्त्री का बेहद खूबसूरती से प्रभाव रूप से ऑडियो द्वारा रचना सुनाई । अपर्णा खरे ने   “समर्पणा ‘ शीर्षक से  सुंदर रचना प्रस्तुत की  ..जौहर की राह,राज क्षत्राणियां करके सिंगार …गाजे बाजे संग चल पड़ी ..बेहद उम्दा इस रचना को सराहा गया .आशा शर्मा  की …दासी को दे थाल हाथ में …जब तलवार उठाई … काट शीश ,धर थाल सजाकर बलि वेदी दे आई.मार्मिक कविता से सभी की आँखें नम हो गई .

तीसरे सत्र में डॉ अनीता नाईक ने रणभूमि में गूँजा था मेवाड़ के शौर्य का गान, हाड़ी रानी ने लिख दिया, त्याग अमर अभियान। विस्तार से गंभीर कविता की रचना की . डोल उठा आकाश ,धरा प्रकृति ने शीश झुकाया…वंदना चौहान की कविता के बाद डॉ.स्वाति तिवारी ने एतिहासिक चरित्र  को समझाने के लिए रानी पर निर्मित एक डाक्यूमेंट्री दिखाई एवं   हाड़ी रानी के  संपूर्ण जीवन चरित्र पर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से राजपूताना थाती और भारतीय नारी के क्षत्राणी धर्म कर्म पर प्रकाश डाला ‘इस कार्यशाला के लिए यह विषय और चित्र मधु सोनी मधुकुंज आलीराजपुर  ने प्रस्तुत किया .सभी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन भी  किया.

इंदौर लेखिका संघ ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : ‘साहित्य और समाज में अभिव्यक्ति के स्त्री स्वर ‘