
Life-saving message; प्रतिबंध के बावजूद ‘चाइनीज मांझा’ (नायलॉन डोर) काल बनकर हवा में तैर रहा है
डॉ. तेज प्रकाश पूर्णानन्द व्यास
इंदौर की सड़कों पर इन दिनों उल्लास के बीच मौत का साया मंडरा रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जब आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भरा होना चाहिए, तब हमारी सड़कों पर निर्दोषों का रक्त बह रहा है। 12 जनवरी 2026 के समाचार पत्रों की सुर्खियां रूह कंपा देने वाली हैं। प्रतिबंध के बावजूद ‘चाइनीज मांझा’ (नायलॉन डोर) काल बनकर हवा में तैर रहा है।
चार दर्दनाक मिसालें:
सोमवार के समाचार पत्रों में छपी ये चार घटनाएं चीख-चीख कर हमें सावधान कर रही हैं:
रघुवीर सिंह धाकड़ (48 वर्ष): टाइल्स ठेकेदार रघुवीर सिंह रविवार शाम करीब 5 बजे अपनी बाइक से रसोमा चौराहे से खजराना ब्रिज की ओर जा रहे थे। अचानक खूनी मांझे ने उनके गले को रेत दिया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मृत्यु हो गई। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।
छात्र नरेंद्र जामोद: सपना-संगीता रोड पर बाइक से जा रहे छात्र नरेंद्र की गर्दन भी मांझे की चपेट में आ गई। खुशकिस्मती से समय रहते अस्पताल पहुंचने और टांके लगने से उसकी जान बच गई, वरना परिणाम घातक हो सकता था।

हुसैन (अम्मार नगर): 9 जनवरी को हुसैन भी इसी जानलेवा डोर का शिकार हुए और गंभीर रूप से घायल हुए।
एयरोड्रॉम क्षेत्र की घटना: रविवार शाम करीब 5:30 बजे एयरपोर्ट रोड पर भी एक बाइक सवार का गला मांझे से कट गया, जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
गर्दन पर मांझे का प्रहार: मृत्यु का कारण: यह समझना आवश्यक है कि गर्दन पर लगा एक छोटा सा कट भी जानलेवा क्यों होता है। हमारी गर्दन शरीर का सबसे संवेदनशील ‘जंक्शन’ है।
जब चाइनीज मांझा (जो कांच और रसायनों से बना एक धारदार प्लास्टिक तार जैसा होता है) गर्दन पर रगड़ खाता है, तो यह मुख्य रूप से तीन प्रमुख रक्त वाहिकाओं को निशाना बनाता है:
कैरोटिड आर्टरी (Carotid Artery) और वर्टिब्रल आर्टरी (vertebral artery )
: यह वे मुख्य धमनी है जो हृदय से मस्तिष्क तक शुद्ध ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाती है।
जुगुलर वेन (Jugular Vein): यह मस्तिष्क से अशुद्ध रक्त वापस लाती है।
जैसे ही मांझा इन वाहिकाओं को काटता है, मस्तिष्क को होने वाली ऑक्सीजन (Oxygen) और हार्मोन की आपूर्ति पल भर में रुक जाती है। चूंकि ये धमनियाँ उच्च दबाव (High Pressure) पर काम करती हैं, इसलिए शरीर का अधिकांश रक्त कुछ ही मिनटों में बाहर बह जाता है। ऑक्सीजन के अभाव में मस्तिष्क के सेल्स मृत होने लगते हैं और व्यक्ति की ‘हाइपोवोलेमिक शॉक’ (Hypovolemic Shock) के कारण मृत्यु हो जाती है।
सुरक्षा का अचूक ‘देशी जुगाड़’
चूंकि प्रशासन की सख्ती के बाद भी यह मांझा बाजार में उपलब्ध है, इसलिए आत्म-रक्षा ही एकमात्र विकल्प है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह ‘देशी विज्ञान’ वरदान साबित हो सकता है:
1. सुरक्षा कवच (मफलर तकनीक): बाइक चलाते समय एक मोटा सूती या ऊनी मफलर गले में कम से कम चार फेरों (4 Layers) में लपेटें। यह चार स्तरीय घेरा मांझे की धार को गर्दन की त्वचा तक पहुंचने से पहले ही रोक देता है। घर्षण होने पर मांझा कपड़े में उलझ जाता है और उसकी गति मंद हो जाती है और घातकता को निरापद करने में मदद करता है।
2. हेलमेट का सही उपयोग: केवल सिर ढकना काफी नहीं है। फुल-फेस हेलमेट पहनें और उसकी पट्टी (Strap) को कसकर बांधें। यह ठुड्डी और गर्दन के ऊपरी हिस्से को सुरक्षा प्रदान करता है।
3. यू-शेप (U-Shape) सुरक्षा तार: अपनी बाइक के आगे एक पतला लोहे का सुरक्षा गार्ड या ‘यू’ आकार का तार लगवाएं। यह हवा में लटकते मांझे को काट देता है, जिससे चालक सुरक्षित रहता है।
4. गले का कॉलर: संक्रांति के दौरान ऊंचे कॉलर वाले जैकेट या नेक-गार्ड का भी प्रयोग करें।
पतंगबाजी खुशियों का त्योहार है, मातम का नहीं। रघुवीर सिंह जैसी घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं। चीनी मांजे का बहिष्कार करें और वाहन चलाते समय ‘मफलर कवच’ को अपनी आदत बनाएं। याद रखें, आपका जीवन आपके परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें।





