Bhagoria: घाटी पर गूंजी कुर्राहट, 60 किलो डोल कंधे पर… पहाड़ी से हुआ भगोरिया का शंखनाद

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Bhagoria: घाटी पर गूंजी कुर्राहट, 60 किलो डोल कंधे पर… पहाड़ी से हुआ भगोरिया का शंखनाद

गंगा महादेव की पहाड़ी से आदिवासी लोकपर्व की विधिवत शुरुआत,
मादल–बांसुरी की थाप पर झूमे वनवासी

गोपाल खंडेलवाल

अमझेरा: आदिवासी अंचल के सबसे रंगीन लोकपर्व भगोरिया का आगाज रविवार को धार जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर स्थित प्राचीन गंगा महादेव मंदिर की पहाड़ी से पूरे विधि–विधान और परंपरागत शंखनाद के साथ हुआ। घाटी में जैसे ही वनग्रामों से आए मादल (डोल) दलों की कुर्राहट गूंजी, पूरा इलाका उस्तव मय हो उठा।
परंपरा अनुसार, 60 किलो से अधिक वजनी मादल को कंधे पर रखकर कलाकारों ने मैदान का चक्कर लगाया। यह दृश्य किसी आश्चर्य से कम नहीं था—कंधे पर भारी डोल, ताल पर थिरकते कदम और बांसुरी की मधुर धुन। दोपहर 4 बजे के बाद मादल दलों का रंग ऐसा चढ़ा कि घाटी देर शाम तक थाप और उल्लास से गूंजती रही।
गंगा महादेव की पहाड़ी से शुरू हुआ यह शंखनाद अब आने वाले दिनों में पूरे अंचल के गांव–गांव तक भगोरिया की धूम पहुंचाएगा।

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“मेले में उमड़ा जनसैलाब”
पहाड़ी और मंदिर परिसर में एक दिवसीय मेले का आयोजन हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने व्यंजनों, झूले–चक्री और खरीदारी का आनंद लिया। बच्चों के लिए मिकी माउस, खिलौनों की दुकानें, वहीं युवाओं के लिए जूस और स्ट्रीट फूड आकर्षण का केंद्र रहे।

नेताओं ने भी थामी थाप
शिवरात्रि के अवसर पर हुए उत्सव में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मेले में पहुंचकर स्वयं मादल बजाया। वहीं अमझेरा थाना प्रभारी राजू मकवाना ने कंधे पर मादल रखकर बांसुरी की धुन पर डोल बजाया, जिसे देख उपस्थित जनसमूह ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।
ग्राम पंचायत सुल्तानपुर के सरपंच मोहन बामनिया, ,कृष्णा रघुवंशी, सचिव बहादुर सिंह, भाजपा नेता दिलीप रघुवंशी, पूर्व सरपंच दरयाव सिंह सहित अन्य गणमान्य जनों ने मादल दलों का सम्मान किया।
घाटी में गूंजती कुर्राहट, कंधों पर थिरकता 60 किलो का डोल और बांसुरी की तान—गंगा महादेव की पहाड़ी से निकला यह शंखनाद साफ संकेत है कि भगोरिया अब पूरे अंचल में रंग, राग और रिश्तों की मिठास घोलने को तैयार है।

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