Dr. Shikha Ghanghoria’s Bird Photo Exhibition : पिता ने पहला कैमरा गिफ्ट किया, फिर तो शौक सिर चढ़ कर बोलने लगा

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Dr. Shikha Ghanghoria’s Bird Photo Exhibition : पिता ने पहला कैमरा गिफ्ट किया, फिर तो शौक सिर चढ़ कर बोलने लगा

  प्रीतमलाल दुआ सभागार में अलग अलग राज्यों की 62 में से 17 चिड़िया तो फुर्र हो गई !

कीर्ति राणा 

इंदौर : ऐसा बहुत कम होता है किसी कलाकार की पहली प्रदर्शनी लगे और पहले ही दिन 17 फोटो पर सोल्ड की स्लिप चस्पा हो जाए। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डॉ शिखा घनघोरिया (प्रो ओंको पैथालॉजी) के 62 चित्रों की बर्ड एग्जीबिशन प्रीतमलाल दुआ सभागृह में 18 जनवरी तक देखी जा सकती है। विधायक मनोज पटेल उद्घाटन करने के बाद चित्रों का अवलोकन कर रहे थे, हो सकता है मेडिकल कॉलेज डीन डॉ अरविंद घनघोरिया का प्रभाव हो या बर्डस् लवर की दिलचस्पी एक चौथाई चित्र सोल्ड होने की खुशी से डॉ शिखा का चेहरा चमक रहा था।
डॉ शिखा के मेंटर हैं वरिष्ठ फोटोग्राफर हेम शंकर पाठक, पिछले पांच साल से वे मिररलेस कैमरे से उन्हें बर्ड फोटोग्राफी से जुड़ी बारीकियां सिखा रहे हैं। इससे पहले श्रीराम चौहान की सलाह पर केनन कंपनी का 800 एमएम का पहला कैमरा
लिया। उन्हीं से कैमरा पकड़ना, सब्जेक्ट पर फोकस करना सीखा था। फिर डॉ संजय खरे ने पाठक सर की क्लास ज्वाइन करने की सलाह दी, वहीं से डॉ शिखा ने डिप्लोमा कोर्स किया।
फोटोग्राफी का शौक लगा कैसे ? इस सवाल पर डॉ शिखा ने कहा पिता (पूर्व मंत्री) गौरीशंकर शेजवार पक्षियों वाले कैलेंडर से फोटो काट कर फ्रेम करवाते थे।मैं लैंस से उन फोटो को बढ़ा कर के देखती थी, बस ऐसे दिलचस्पी बढ़ गई। भोपाल मेडिकल कॉलेज में थी तो उन्होंने 36 रील वाला पहला कैमरा गिफ्ट किया था, अब तो मिररलेस कैमरे से फोटोग्राफी कर रही हूं लेकिन वो कैमरा अभी भी सहेज रखा है।

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आप ये जो 62 फोटो दख रहे हैं वो पिछले पांच साल के दौरान हम दोनों (डॉ अरविंद) हर साल कार से हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात, मप्र, विंध्याचल, कर्नाटक, केरला आंध्र प्रदेश आदि राज्यों की यात्रा के दौरान जंगलों में बर्ड तलाशते और फोटो लेते रहते थे।ड्रायवर भी साथ इसलिये नहीं रखते की हम दोनों ड्राइव करते थे। बर्डस् फोटोग्राफी इसलिये भी चुनौतीपूर्ण है कि धैर्य बेहद जरूरी है। एक तरह से ध्यान, तपस्या जैसा है। एंगल जमाते-जमाते, हल्की सी आहट पर परिंदा कब उड़ जाए कह नहीं सकते, कैमरा हाथ में रहते हुए मौन साधना जैसा रहता है।
जब पिता गौरीशंकर मंत्री थे, उसी दौरान मुंबई के विख्यात डॉ रमाकांत पांडा से मुलाकात हुई, वे भी फोटोग्राफी करते हैं। पिताजी ने उन्हें कान्हा किसली सहित मप्र के अन्य टूरिस्ट स्पॉट देखने के लिये निमंत्रित किया था। फिर तो डॉ पांडा मप्र के मुरीद हो गए।
🔹’बेटर हॉफ का मैं बेस्ट ड्रायवर’
पत्नी के इस शौक को लेकर डॉ अरविंद घनघोरिया का कहना था चिकित्सा सेवा के साथ शिखा का यह शौक उन्हें सुकून देता है। मैं फोटोग्राफी में भले ही ज्यादा नहीं समझता लेकिन जब दो महीने फोटोग्राफी टूर रहता है तब बेटर हॉफ के लिये, मैं बेस्ट ड्राइवर की भूमिका में भी खुशी महसूस करता हूं।पहली एग्जीबिशन के लिये इंदौर को इसलिये ही चुना कि हम दोनों यहां मेडिकल कॉलेज में हैं हमारी कर्मभूमि है, रिस्पॉंस भी अच्छा मिला है। जबलपुर जन्मभूमि है वहां और भोपाल में भी लगाने की कोशिश करेंगे।
पाठक के चित्रों की प्रदर्शनी 6 फरवरी से
दुआ सभागार में 6 फरवरी से वरिष्ठ फोटोग्राफर हेमशंकर पाठक के फोटो की प्रदर्शनी लगेगी। प्रकृति के विभिन्न मूड दर्शाते फोटो की इंदौर में उनकी यह दूसरी एकल प्रदर्शनी होगी। ग्रुप एग्जीबिशन में कई बार उनके फोटो प्रदर्शित हो चुके हैं।
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