
₹1400 करोड़ बैंक फ्रॉड केस: PMLA केस में कासलीवाल को झटका
के के झा की विशेष रिपोर्ट
इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने एक अहम फैसले में उद्योगपति नितिन शंभुकुमार कासलीवाल की एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के खिलाफ दाखिल रिट पिटिशन को खारिज कर दिया है। कासलीवाल ने ED के 22 दिसंबर 2025 के सर्च ऑथराईजेशन और 23 दिसंबर 2025 को किए गए सर्च एवं सीज़र ऑपरेशन को चुनौती दी थी।
बेंच के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और अलोक अवस्थी ने यह स्पष्ट किया कि पीएमएलए के अंतर्गत वैकल्पिक वैधानिक उपचार पहले से उपलब्ध है, इसलिए न्यायालय इस याचिका पर हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि कासलीवाल संविधान द्वारा प्रदत्त वैकल्पिक उपायों का उपयोग उचित मंच पर कर सकते हैं।
कासलीवाल, जो कि अब बंद हुई एस. कुमार्स नेशनलवाइड लिमिटेड (SKNL) के पूर्व चेयरमैन और MD हैं, पर लगभग ₹1,400 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप हैं, जिनमें कथित तौर पर बैंकों को धोखा देकर फंड्स का विदेशी निवेश के माध्यम से ऑफशोर संरचनाओं में विभक्त करने का आरोप है।
ED की इस कार्यवाही के बीच ही, लंदन के बकिंघम पैलेस के पास एक उच्च मूल्य की संपत्ति (लगभग ₹150 करोड़) को भी पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया गया है, जिसका लाभकारी मालिकाना हक कासलीवाल और उनके परिवार के नाम बताया गया है।
*न्यायालय का निर्णय*
कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए के तहत वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं और याचिका पर अब और कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
अदालत ने ED की जांच प्रक्रिया को बरकरार रखा और कहा कि आरोपियों के पास आगे की कानूनी चुनौती का रास्ता मौजूद है।





