Women’s Press Club: इंदौर में वुमंस प्रेस क्लब के शक्ति अवार्ड से 40 महिलाएं सम्मानित

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Women’s Press Club:इंदौर में वुमंस प्रेस क्लब के शक्ति अवार्ड से 40 महिलाएं सम्मानित

इंदौर। म.प्र. उच्च न्यायलय के प्रशासनिक न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि बोलियां हमें हमारी संस्कृति और परम्पराओं से जबकि भाषा समाज और राष्ट्रीयता से जोड़ती है। भारत की विविधता उसकी शक्ति है और भाषाई समृद्धि उसकी पहचान।
श्री शुक्ला वुमंस प्रेस क्लब, म.प्र. के दसवें अवार्ड समारोह “शक्ति” को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाषा और बोली मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं। भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाते हैं, जबकि बोली भाषा का ही स्थानीय रूप होती है, जो किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय में प्रचलित होती है। भाषा समाज को एकजुट करती है और संस्कृति को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है और सभ्यता का विकास संभव होता है। उन्होंने कहा कि भाषा और बोली दोनों ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित और विकसित करना आवश्यक है। यदि हम अपनी भाषा और बोलियों का सम्मान करेंगे, तो हमारी पहचान और परंपराएँ भी सुरक्षित रहेंगी। श्री शुक्ला ने महिलाओं के अधिकार एवं महिलाओं के हक में बने कानून के उपयोग-दुरूपयोग पर भी प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम की विशिष्ठ अतिथि म.प्र. लोक सेवा आयोग की सचिव राखी सहाय ने कहा कि महिलाओं के सम्मान के आयोजन महिलाओं में आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाते हैं तथा उन्हें समाज में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में विधायक गोलू शुक्ला, पं. योगेंद्र महंत, समाजसेवी डॉ. संध्या चौकसे, समाजसेवी अर्चना जायसवाल एवं एडवोकेट डॉ. पंकज वाधवानी भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे।
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अतिथियों ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 40 महिलाओं को स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र भेंट कर “शक्ति अवार्ड 2026” से सम्मानित किया। प्रारम्भ में अध्यक्ष शीतल रॉय ने वुमंस प्रेस क्लब की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत प्रवीण खारीवाल, रचना जौहरी, ऋतु साहू, डॉ. कल्पना सक्सेना एवं सोनाली यादव ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुनयना शर्मा ने किया।
जाल सभागृह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आयोजित टॉक शो में सम्मानित नारी शक्तियों ने अपने जीवन के संघर्ष व अनुभव साझा किए। इस दौरान कई प्रतिभागी भावुक हो उठीं—किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े, तो किसी ने रुंधे गले से अपनी जीवन यात्रा सुनाई। इन सजीव अनुभवों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया और यह संदेश दिया कि हर सफलता के पीछे एक लंबा संघर्ष और अटूट साहस छिपा होता है।