5 हजार वर्ष पुराना आस्था धाम: मां अमका-झमका के दरबार में आज से सजेगा श्रद्धा का महासागर

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5 हजार वर्ष पुराना आस्था धाम: मां अमका-झमका के दरबार में आज से सजेगा श्रद्धा का महासागर

अमझेरा (धार) से गोपाल खंडेलवाल 

अमझेरा (धार): चैत्र नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रही है और इसके साथ ही धार जिले का प्रसिद्ध मां अमका-झमका तीर्थ एक बार फिर आस्था, साधना और शक्ति का केंद्र बन गया है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन धाम 5 हजार वर्ष पुरानी पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, जहां आज भी माता की अलौकिक शक्ति का अनुभव भक्त करते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन से ही यहां विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और हवन का दौर शुरू हो जाता है। दूर-दराज से श्रद्धालुओं का आना लगातार बढ़ता है और पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बनने लगा है।

*”एक ही परिसर में तीन शक्तियों का संगम”*

मंदिर परिसर में मां अमका-झमका का अलौकिक स्वरूप विराजमान है। इसके साथ ही यहां माता अंबिका और चामुंडा माता के भी चमत्कारिक मंदिर स्थित हैं।

चामुंडा माता को पवार वंश सहित महाराष्ट्र के अनेक परिवारों की कुलदेवी माना जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि में महाराष्ट्र, गुजरात, इंदौर, रतलाम और झाबुआ सहित कई क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

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*”मुख्यमंत्री की पहल से बदलेगा स्वरूप”*

आने वाले समय में इस प्राचीन तीर्थ का स्वरूप और भव्य हो सकता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं इस स्थल के जीर्णोद्धार और विकास में रुचि दिखाई है।

प्रस्तावित योजना में यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था, शौचालय, द्वापर कालीन घटनाओं का सचित्र वर्णन और अन्य सुविधाएं विकसित किए जाने की संभावना है।

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*”ग्रामीणों ने संभाली विरासत, दानदाताओं ने दिया साथ”*

कुछ वर्ष पहले तक यह तीर्थ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। प्राचीन कुंड, मंदिर परिसर और अन्य स्थल अपनी पहचान खोते जा रहे थे।

ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों ने विकास समिति बनाकर जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। जनसहयोग और दानदाताओं के योगदान से मंदिर, कुंड और उद्यान को फिर से संवारा गया।

आज यह तीर्थ अपने पुराने वैभव की ओर लौट चुका है और लगातार विकसित हो रहा है।

“आस्था, इतिहास और चमत्कार का संगम”

मां अमका-झमका तीर्थ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और लोक विश्वास का संगम है।

जहां एक ओर श्रीकृष्ण-रुक्मिणी हरण की कथा इसे पौराणिक पहचान देती है, वहीं नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली भीड़ इसकी जीवंत आस्था का प्रमाण बनती है।

माना जाता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही वजह है कि हर साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

 

*द्वापर कालीन इतिहास से जुड़ा धाम*

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही पावन स्थल है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण ने माता रुक्मिणी का हरण किया था। यही कारण है कि यह स्थान “श्रीकृष्ण-रुक्मिणी हरण स्थल” के रूप में विख्यात है और इसकी पौराणिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

माता का चमत्कारिक स्वरूप और अटूट विश्वास

मंदिर परिसर में विराजमान मां अमका-झमका का स्वरूप भक्तों को अद्भुत ऊर्जा और आस्था से भर देता है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता की शक्ति को अनुभव करने की बात कहते हैं।

साथ ही परिसर में माता अंबिका और चामुंडा माता के मंदिर भी स्थित हैं, जो इस स्थान को और भी दिव्य बनाते हैं।