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विज्ञापन सहित अन्य की जो राशि एसबीआई बैंक में जमा हुई थी, उसे बाद में नए खातों में ट्रांसफर कर ली थी। हिसाब मांगने पर इस गबन का खुलासा हुआ है। यह कांग्रेस छह साल पहले हुई थी। इसका आयोजन डॉक्टरों ने किया था। कॉन्फ्रेंस खत्म होने के दोनों अकाउंट बंद करवा दिए। अकाउंट बंद करने के बाद जीएसटी नंबर सरेंडर किए थे। तीनों डॉक्टरों ने 2 करोड़ 71 लाख रुपए का गबन किया था।
6 साल पहले की शिकायत
आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ लैगिंगोलॉजिस्ट ऑफ़ इंडिया संस्था के इंदौर ब्रांच के तत्कालीन सचिव डॉ राहिल निधान ने बताया कि हमने कोर्ट में 6 महीने पहले शिकायत की थी। कोर्ट ने संबंधितों पर केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे। 2018 में कांफ्रेंस में स्पॉन्सरशिप और सदस्यों के माध्यम से 6 करोड़ 17 लाख रुपए इकट्ठा हुए थे, जिसमें 3 करोड़ 44 लाख रु. का खर्च बताया गया। शेष राशि डॉक्टरों ने अपने पास रख ली थी।
मेडिकल कंपनियों ने भी हिस्सा लिया
इस कान्फ्रेंस को राष्ट्रीय स्तर पर सफल बनाने का दावा किया गया था। ऐसे में कई मेडिकल कंपनियों ने विज्ञापन किए और पार्टनर भी बने। एक अकाउंट एमवाय कैम्पस की ब्रांच, दो अन्य अकाउंट एचडीएफसी बैंक और कोटक महिन्द्रा में खुलवाए। इन खातों की जानकारी आरोपी डॉक्टरों ने संस्था से छुपाई थी। पहले अकाउंट से पेमेंट को इन लोगों ने नए दोनों अकाउंट में ट्रांसफर कराया और फायदा उठाया।