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वे बठिंडा और गुरदासपुर के उपायुक्त भी रहे
केएपी सिन्हा ने भारत सरकार में विदेश मंत्रालय, उद्योग और वाणिज्य, परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में भी सेवा दी हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी भाग लिया है। पंजाब में फील्ड पोस्टिंग के दौरान सिन्हा ने बठिंडा और गुरदासपुर के उपायुक्त के रूप में भी सेवाएं दी हैं।
बीटेक की डिग्री हासिल की
उन्होंने धनबाद के आईआईटी आईएसएम से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, एलएलएम और बीटेक (खनन इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की। नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड के इंदौत गांव निवासी कुमार अनुग्रह प्रसाद सिन्हा (केएपी सिन्हा) की प्रारंभिक शिक्षा गांव के लिए सरकारी स्कूलों में हुई। केएपी सिन्हा के छोटे भाई कुमार प्रवीण शंकर अभी कोलकाता में लफार्ज सीमेंट कंपनी में काम करते हैं।
उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई केएपी सिन्हा ने गांव के स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद हिलसा के रामबाबू हाईस्कूल से वर्ष 1982 में मैट्रिक परीक्षा पास की। इसके बाद एसयू कॉलेज हिलसा से ही 1984 में इंटर की परीक्षा पास की। इसी दौरान इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) धनबाद में उनका चयन हुआ।
यूपीएससी की तैयारी
इंजीनियरिंग के बाद ही उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। बिना कोचिंग खुद की मेहनत की बदौलत तीसरे चांस में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। वे सबसे पहले जालंधर के एसडीएम बनाए गए। गुरदासपुर और अम्बाला के डीएम रहे। कुछ साल के लिए केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर विदेश मंत्रालय में रहे। इस दौरान राजगीर में स्थापित किया जा रहा अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना में भरपूर मदद की।