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आवेदन शॉर्टलिस्ट किए
शिकायतकर्ता को जानकारी मिली की शासन की विज्ञप्ति के बाद किए जाने वाले ऑनलाइन आवेदन पत्रों में से शॉर्टलिस्ट किए जाने वाले छात्र-छात्राओं का इंटरव्यू सिलेक्शन कमेटी द्वारा लिया जाता है। इसके बाद पात्र छात्र-छात्राओं को लाभ दिया जाता है। आवेदन एवं दस्तावेजों की प्रक्रिया पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से होकर गुजरती है। इसमें छात्र द्वारा जिस विदेशी यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर एवं जितने वर्ष का कोर्स हो, संलग्न होते हैं।
500 रैंकिंग तक छात्रवृत्ति
यदि यूनिवर्सिटी के ऑफर लेटर में एक वर्ष का कोर्स हो तो शासन द्वारा छात्र को एक वर्ष की स्कालरशिप दी जाती है। 500 रैंकिंग तक ही स्कालरशिप दी जाती है। लेकिन, शिकायतकर्ता को दस्तावेजों से पता चला कि जिस छात्र ने एक वर्ष का हैरियट वार्ट यूनिवर्सिटी दुबई में कोर्स की डिटेल का ऑफर लेटर लगाया था, उसे एक वर्ष के स्थान पर दो वर्ष की स्कालरशिप कुल 26,99,763 रुपए दिए। एक अन्य छात्रा को भी यूनिवर्सिटी ऑफ कनाडा के पास क्यूएस रैंकिंग न होने के बाद भी यूनिवर्सिटी के लिए 16 लाख रुपए की स्कालरशिप दी गई।
नहीं होता दस्तावेजों का परीक्षण
इससे स्पष्ट है कि विदेशी यूनिवर्सिटी के एक वर्ष के कोर्स के बदले छात्र दो वर्ष स्कालरशिप ले रहे हैं। दस्तावेजों का निरीक्षण नहीं करते हुए स्कालरशिप देने वाले अधिकारी एवं स्कालरशिप लेने वाले छात्र छात्रा भी घोटाले में शामिल हैं, जिसे लेकर लंदन, यूके, दुबई, मलेशिया यूनिवर्सिटी को लेकर कुछ अपात्र छात्र-छात्राओं ने शासन को करोड़ों का चूना लगाया है।