
पंख मिलने वाले हैं, उड़ने के लिए तैयार हो जाओ…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
हर व्यक्ति हवा में उड़ना चाहता है। और वैसे देखा जाए तो जमीन पर रहने के लिए तो कोई तैयार ही नहीं है। चंद्रमा पर रहने की कल्पना तो बहुत लोगों के मन में होगी, उससे ज्यादा कल्पना सबके मन में यह है कि हम पक्षियों की तरह हवा में उड़ सकें। 1963 में बनी ‘सेहरा’ फिल्म का लता मंगेशकर की आवाज में वह गीत ‘पंख होते तो उड़ आती रे, रसिया हो जालिमा। तुझे दिल का दाग दिखलाती रे…’ आज भी दिलों में उड़ने की चाह पैदा कर देता है। और अब चीन ने इस चाहत में रंग भरने का काम कर दिया है। तो खबर यही है कि चीन ने दुनिया का सबसे चौंकाने वाला आविष्कार कर दिया है। अब अकेला इंसान 150 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकेगा। चीन ने इंसानी जीवन का सबसे क्रांतिकारी आविष्कार करके पूरी दुनिया में नया कौतूहल पैदा कर दिया है। चीनी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा बैकपैक बनाया है, जिससे अकेला इंसान 150 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ान भर सकेगा। तो अब मन की कल्पना सच होने वाली है और इंसान पक्षियों की तरह आकाश मार्ग से हवा में बातें करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचने का सपना जल्दी ही साकार होने के बारे में सोच सकता है। इंसानों को भी जल्दी ही पंख मिलने वाले हैं हवा में उड़ने के लिए तैयार हो जाओ।
गीत के साथ-साथ खबर को आगे बढ़ाते हैं। गीत आगे इस तरह से है कि ‘यादों में खोई पहुंची गगन में, पंछी बनके सच्ची लगन में। दूर से देखा मौसम हंसी था, आने वाले तू ही नहीं था। रसिया हो जालिमा, तुझे दिल का दाग दिखलाती रे। तो खबर यही है कि चीन ने इंसानी दुनिया के लिए एक और बड़ा चमत्कारी आविष्कार करके सबको चौंका दिया है। चीनी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा “उड़ता बैकपैक” बनाया है, जिसकी सहायता से कोई भी इंसान 100 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ान भर सकेगा। इसे इंसानों की भविष्य की उड़ान कहा जा रहा है। यह धरती पर इंसानों का जीवन बदल देगा। इससे न तो भारी ट्रैफिक में इंसान अपना समय गंवाएगा और न ही, उसे अपनी यात्रा में ऐसी रुकावटों का सामना करना पड़ेगा। तो यादों में खोकर गगन में पहुंचो और हसीन मौसम में मन की गति से हवा में बातें करते हुए मनचाही मंजिल पर पहुंचने को तैयार हो जाओ।
किरनें बनके बाहें फैलाई, आस के बादल पे जाके लहराई। झूल चुकी मैं वादे का झूला, तू तो अपना वादा ही भूला। रसिया हो जालिमा,तुझे दिल का दाग दिखलाती रे। आगे की बात यह है कि चीन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसा उड़ने वाला बैकपैक विकसित किया है जो किसी व्यक्ति को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ने की क्षमता देता है और 1,500 मीटर की ऊंचाई तक ले जा सकता है। इस खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इंसानों की दिलचस्पी उड़ान भरने को लेकर बढ़ गई है। तो बांहें फैलाइए और सही के बादलों में उड़ान भरने की तैयारी कर लीजिए। जो वादा भूले, पंख लगाकर उड़कर उसको वादा याद दिलाने की तैयारी कर लीजिए।
निश्चित तौर पर आप भी इस बैकपैक के बारे में जानना चाहते होंगे और इसे ऑर्डर कर मंगाने का भी सोच रहे होंगे। बैकपैक के बारे में छोड़िए और उड़ने का सपना जल्दी पूरा होगा…उस समय का इंतजार कीजिए। वहीं स्विट्जरलैंड एक ऐसा देश है, जहां गरीब होना किसी अपराध जैसा है। यह यूरोप के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, यहां सड़क पर कोई भिखारी या बेघर व्यक्ति नजर आना लगभग असंभव है। सरकार गरीबी को इतनी सख्ती से नियंत्रित करती है कि यह लगभग ‘गायब’ हो चुकी है। तो हम ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहां कोई गरीब नहीं होगा और पंख लगाकर उड़कर अपनी मनचाही मंजिल पर पहुंच सकेगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





