मेट्रोपॉलिटन रीजन, इंदौर में सर्वे की तैयारी,भोपाल में प्लानिंग ही नहीं हो पाई

मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया फायनल करने में इंदौर,भोपाल से आगे

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मेट्रोपॉलिटन रीजन, इंदौर में सर्वे की तैयारी,भोपाल में प्लानिंग ही नहीं हो पाई

भोपाल। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया फायनल करने में भी इंदौर अब भोपाल से आगे निकल गया है। इसकी अधिसूचना विधानसभा सत्र से पहले और अथॉरिटी का गठन विधानसभा के दौरान होगा पर भोपाल में इस दिशा में काम काफी धीमी गति से चल रहा है। भोपाल में मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिये सर्वे का काम तीन से चार माह लेट चल रहा है। बीडीए से जुड़े सूत्रों के अनुसार  भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन  प्रारंभिक तौर पर तैयार हो चुका है। यह आठ हजार स्क्वायर किमी के आसपास है। इसका सर्वे और एरिया तय करने का काम सेप्टयूनिवर्सिटी अहमदाबाद को दिया जा सकता है।

*क्या रहेगा खास*
भोपाल में मेट्रोपॉलिटन सिटी में सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ जिले भोपाल बीएमआर के हिस्से होंगे। इन जिलों को शामिल करने के बाद भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का क्षेत्र 463 वर्ग किमी से करीब 21 गुना बढ़कर 9600 वर्ग किमी का हो जाएगा। इसी के साथ मप्र मेट्रोपॉलिटन रीजन वाला देश का 13वां राज्य बन जाएगा। इस रीजन में स्वच्छ हवा, चलने के लिए अच्छी सड़कें, आवाजाही के लिए मेट्रो व अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट तो रोजगार के लिए ढेरों मौके मिलेंगे। यूं कहें कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए लोगों को दिल्ली-मुंबई, हैदराबाद जैसे शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।

एक ही सर्किट में जुटेंगी सुविधायें
यहीं महानगरीय सुविधाएं मिल जाएंगी। सरकारी तंत्र अगले 14 माह में मेट्रोपॉलिटन रीजन की इबारत लिख देगा। इसमें महानगरीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुविधा, मेट्रो उपनगरीय ट्रेन सेवा, 12 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र, स्वास्थ्य सेवाएं और पांच जिलों के पर्यटन क्षेत्र एक ही सर्किट में होंगे।  आर्थिक विकास की नीति किस तरह की होगी. इसमें उपलब्ध संसाधनों के उचित उपयोग की रूपरेखा तय की जाएगी. इसके अलावा कृषि भूमि, जल निकास, यातायात, औद्योगिक क्षेत्र, पर्यटन, जल आपूर्ति, वन संरक्षण जैसे तमाम क्षेत्रों के लिए मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट प्लान में नीति तय की जानी है।