पुतिन के हैंडशेक पर सोशल मीडिया में फैली गलतफहमियों पर विराम: भारत के सैन्य प्रोटोकॉल की सच्चाई सामने आई

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पुतिन के हैंडशेक पर सोशल मीडिया में फैली गलतफहमियों पर विराम: भारत के सैन्य प्रोटोकॉल की सच्चाई सामने आई

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन के दौरान हुए एक सामान्य-से दिखने वाले हैंडशेक को सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावों के साथ वायरल किया जा रहा है। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे “पुतिन का एक मामूली सैनिक से हाथ मिलाना” बताया, जबकि कुछ ने इसे भारत की सैन्य शक्ति का विशेष संदेश बताने की कोशिश की। जांच के बाद स्पष्ट हुआ है कि दोनों दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस घटना का संबंध केवल भारतीय सैन्य प्रोटोकॉल से है।

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▪️गार्ड कमांडर से हाथ मिलाना प्रोटोकॉल का हिस्सा
▫️वीडियो में दिख रहा अधिकारी कोई सामान्य जवान नहीं, बल्कि Tri-Services Guard of Honour का Commander था। यह पद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को मिलता है, जिनकी रैंक प्रायः मेजर, लेफ्टिनेंट कर्नल, विंग कमांडर या उनके समकक्ष होती है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत में यही अधिकारी सलामी और परेड संचालन की कमान संभालता है। पुतिन ने इसी औपचारिकता के तहत गार्ड कमांडर से हाथ मिलाया।

▪️भारतीय परंपरा में वर्दी का सम्मान पहले
▫️राजकीय स्वागत के दौरान भारत में प्रोटोकॉल स्पष्ट है—सबसे पहले तीनों सेनाओं की संयुक्त गार्ड से सम्मान, उसके बाद निरीक्षण और फिर औपचारिक हस्तलिपि। इस प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तियों से अधिक प्राथमिकता वर्दी और सैन्य परंपराओं को दी जाती है। यही कारण है कि राष्ट्राध्यक्षों के आगमन पर सबसे पहले गार्ड कमांडर की उपस्थिति और नेतृत्व होता है।

▪️पुतिन के Lieutenant Colonel होने का दावा गलत
▫️सोशल मीडिया पर यह भी प्रचारित किया गया कि पुतिन स्वयं पहले Lieutenant Colonel के पद पर रहे हैं। उपलब्ध सार्वजनिक सैन्य रिकॉर्ड और प्रमाणित स्रोतों में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता। पुतिन KGB अधिकारी और बाद में रूस की FSB एजेंसी के प्रमुख रहे, पर उनकी सैन्य रैंक को लेकर फैलाया गया दावा आधारहीन है।

▪️घटना का वास्तविक अर्थ
▫️यह हैंडशेक किसी “साधारण सैनिक के सम्मान” या “दुनिया को दिया गया बड़ा संदेश” की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि यह भारत के नियमित सैन्य प्रोटोकॉल का हिस्सा है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत में गार्ड कमांडर से औपचारिक अभिवादन विश्वभर में प्रचलित शिष्टाचार है और भारत भी इसी व्यवस्था का पालन करता है।