आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संगम: उदयगढ़ में श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ

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आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संगम: उदयगढ़ में श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ

उदयगढ़। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के पावन अवसर पर नगर उदयगढ़ में स्थित रियासत कालीन श्रीराम मंदिर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का जीवंत केंद्र बन गया। अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा के तारतम्य में हिंदू पंचांग के अनुसार मनाए जा रहे इस विशेष दिन पर नगरवासियों ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का भव्य उत्सव बनकर सामने आया।

🔅मंगलमय शुरुआत और नगर भ्रमण

▫️इस पुण्य पावन दिन की शुरुआत प्रातःकाल मंगलमय वातावरण के साथ हुई। नगर के महिला, पुरुष और बच्चों ने हाथों में भगवा ध्वज लेकर भजन कीर्तन करते हुए ढोल धमाके के साथ पूरे नगर का भ्रमण किया। प्रभु श्रीराम के जयघोष और भक्ति गीतों से नगर की गलियां गूंज उठीं। यह दृश्य न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक था, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बना।

🔅मंदिर परिसर में भव्य श्रृंगार

▫️श्रीराम मंदिर परिसर में स्थित राम दरबार, संकट मोचन हनुमान, बाबा भैरवनाथ और मां दुर्गा का भव्य श्रृंगार किया गया। पूरे मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया संवारा गया। मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया गया, जिसने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। दिन भर श्रद्धालुओं का मंदिर में दर्शन के लिए तांता लगा रहा। श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते रहे।

🔅सांझ की महा आरती और छप्पन भोग

▫️शाम 5:00 बजे संपूर्ण नगरवासी मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। भजन कीर्तन के साथ महा आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभु श्रीराम को छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारी गोविंद जी शर्मा ने विधि विधान पूर्वक सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के स्वर ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर रहा।

🔅श्रीराम वाटिका में भंडारा और सामाजिक समरसता

▫️धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत श्रीराम वाटिका में संपूर्ण नगरवासियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में सभी वर्ग और समुदाय के लोगों ने एक साथ प्रसादी ग्रहण की। यह आयोजन सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का उत्कृष्ट उदाहरण बना। आयोजन में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं दिखाई दिया और सभी ने समान भाव से सहभागिता की।

🔅आस्था और परंपरा का प्रेरक संगम

▫️उदयगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रेरक सिद्ध हुआ। प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर नगरवासियों ने यह संदेश दिया कि आस्था के साथ जब एकता और सहभागिता जुड़ती है, तो समाज और संस्कृति दोनों सशक्त होते हैं। रियासत कालीन श्रीराम मंदिर एक बार फिर नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनकर उभरा।