
इतिहास बोध, नारी शक्ति और धर्म रक्षा का आह्वान: उदयगढ़ में हिन्दू सम्मेलन संपन्न, 5 हजार लोगों ने की सहभागिता
UDAYGARH : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष आयोजन की भावना को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से अलीराजपुर जिले के उदयगढ़ में आयोजित मंडल स्तरीय प्रथम हिन्दू सम्मेलन रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि समाज को उसके इतिहास, सांस्कृतिक चेतना, नारी शक्ति और धर्म रक्षा के दायित्व का स्मरण कराने का मंच बना। ब्लॉक कॉलोनी के समीप खुले खेत में आयोजित इस सम्मेलन में 12 ग्राम पंचायतों से आए करीब 5000 लोगों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज अपने मूल्यों और पहचान को लेकर सजग है।

सम्मेलन का उद्देश्य पंच परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्यों को व्यवहार में उतारना रहा। आयोजन स्थल पर अनुशासन, व्यवस्था और सहभागिता का समन्वय देखने को मिला।
▪️ग्राम यात्रा से बना वातावरण
▫️कार्यक्रम से पूर्व पूरे उदयगढ़ नगर में पारंपरिक ढोल, मांडल और शहनाई वाद्य यंत्रों के साथ भव्य ग्राम यात्रा निकाली गई। हाथों में भगवा ध्वज और श्रीराम के जयकारों के साथ जब यह यात्रा नगर मार्गों से गुजरी तो पूरा क्षेत्र जय श्रीराम और भारत माता के उद्घोष से गूंज उठा। ग्राम यात्रा का नेतृत्व आदिवासी समाज के प्रखर नेता कमलसिंह (कमरूभाई) अजनार, विधानसभा नेता विशाल रावत, जिला पंचायत सदस्य मांगीलाल चौहान और जिला महामंत्री राजू मुवेल, मंडल अध्यक्ष जितेंद्र गुजराती ने किया ने किया। इस यात्रा ने सम्मेलन के लिए वैचारिक और भावनात्मक पृष्ठभूमि तैयार की।

▪️पारंपरिक सम्मान और मंच व्यवस्था
▫️धर्मसभा स्थल पर पहुंचने पर तडवी, पटेल और पुजारा समाज के प्रतिनिधियों का साफा और पुष्पमाला पहनाकर पारंपरिक सम्मान किया गया। सभी समाज प्रमुखों को मंच पर स्थान देकर उनका भी अभिनंदन किया गया।
▪️बौद्धिक सत्र रहा सम्मेलन का केंद्र
▫️सम्मेलन के बौद्धिक सत्र में झाबुआ विभाग संगठन मंत्री कृष्णपाल यादव ने समाज को उसके इतिहास और दायित्व से जोड़ने वाला संबोधन दिया। उन्होंने भारत के प्राचीन इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और सनातन चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज अपने अतीत को भूलता है तब वह अपने भविष्य को भी कमजोर कर देता है। उन्होंने धर्म रक्षा को केवल भावनात्मक विषय नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व बताया।
उन्होंने नारी शक्ति की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय समाज में संस्कृति और संस्कारों की सबसे मजबूत वाहक मातृशक्ति रही है। नारी शक्ति के बिना न समाज सुरक्षित रह सकता है और न ही धर्म की रक्षा संभव है। उनका संबोधन पूरे सम्मेलन की वैचारिक धुरी बना।
▫️मातृशक्ति की ओर से तृप्ति सोनी और राधा शर्मा ने महिला सशक्तिकरण और धर्म जागरण पर अपने विचार रखते हुए कहा कि परिवार और समाज में संस्कारों की पहली पाठशाला मां होती है। जब महिलाएं सजग होती हैं तब पूरा समाज स्वतः सशक्त बनता है।
▪️धर्मांतरण पर चेतावनी और जिम्मेदारी का बोध
▫️ आदिवासी समाज के नेता कमलसिंह अजनार ने ग्राम प्रमुखों, पटेल, तडवी और पुजारा समाज से अपने अपने गांवों में सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लालच आधारित धर्मांतरण समाज के लिए सबसे बडा खतरा है। यदि समय रहते सजगता और जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो यह दीमक की तरह पूरे समाज- देश को कमजोर कर देगा। उन्होंने सामाजिक चौकसी और एकजुटता पर जोर दिया।
▪️कैबिनेट मंत्री की सहभागिता
▫️सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने सहभागिता करते हुए भारत माता की आरती में भाग लिया और धर्म एवं राष्ट्र की एकता अखंडता का संदेश दिया। उनकी उपस्थिति से आयोजन को विशेष गरिमा मिली।
▪️सहभोज से समरसता का संदेश
▫️कार्यक्रम के अंत में सामाजिक समरसता के अनुरूप सभी जाति और समाज वर्ग के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसादी स्वरूप भोजन ग्रहण किया। यह सहभोज सम्मेलन के वैचारिक संदेश को व्यवहार में उतारने का प्रतीक बना।
▪️इनका रहा उल्लेखनीय योगदान
▫️आयोजन को सफल बनाने में राजू मुवेल, जितेंद्र गुजराती, धन्नालाल राठौड, नरेंद्र जैन, प्रकाश जमरा, आशीष राठौड, गोवर्धन राठौड, पंडित गोविंद जी शर्मा, डीके पाटीदार, पवन राठौड, संदीप जैन, प्रकाश गुजराती, दीपराज गेहलोत, विजू केरम मुवेल, भावना नागर सहित क्षेत्र के सरपंच व अन्य प्रतिनिधियों का विशेष योगदान रहा। सभी कार्यकर्ताओं की सामूहिक मेहनत से सम्मेलन अनुशासित और प्रभावशाली रूप में संपन्न हुआ।





