आप पृथ्वी पर एक सपने की तरह चल रहे हैं…

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आप पृथ्वी पर एक सपने की तरह चल रहे हैं…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

“आप पृथ्वी पर एक सपने की तरह चल रहे हैं। हमारी दुनिया एक सपने के भीतर एक सपना है; आपको यह समझना होगा कि ईश्वर को पाना ही एकमात्र लक्ष्य है, एकमात्र उद्देश्य है जिसके लिए आप यहाँ हैं। केवल उन्हीं के लिए आपका अस्तित्व है। आपको उन्हीं को खोजना होगा।”

परमहंस योगानंद की पुस्तक ‘द डिवाइन रोमांस’ का यह उद्धरण मानव को एक अलग दुनिया में ले जाता है और वह दुनिया अध्यात्म की है। 20वीं सदी के पहले सुपरस्टार गुरु परमहंस योगानंद ने आध्यात्म के जरिए मानव को उसी दुनिया की सैर कराने में सफलता पाई है जहाँ जाना हर व्यक्ति का परम लक्ष्य है। पुस्तक ‘द डिवाइन रोमांस’ के जरिए हम जान पाते हैं

कि परमहंस योगानन्दजी का जीवन ईश्वर के साथ एक सतत् प्रेम-लीला थी। अतः यह ईश्वर के द्वारा रचित प्रत्येक आत्मा के लिये उनके प्रेम के विषय में, एक पुस्तक है, और किस प्रकार हम एक अवतरित आत्मा के रुप में ईश्वर की प्रेममयी उपस्थिति को अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं। लेखक का सन्देश सर्वजनीन अनुरोध है, क्योंकि कौन-सा मनुष्य परिशुद्ध प्रेम – प्रेम जो समय, वृद्धावस्था अथवा मृत्यु के साथ धुँधला नहीं होता, के लिये कभी लालायित नहीं हुआ है? निश्चित रुप से प्रत्येक व्यक्ति ऐसे किसी सम्बन्ध की चिरस्थायी सन्तुष्टि एवं पूर्णता अनुभव करने के लिये लालायित रहा है। परन्तु सदैव यही प्रश्न रहा है, “क्या यह वास्तव में सम्भव है?” परमहंस योगानन्दजी निर्भीकतापूर्वक घोषणा करते हैं कि यह सम्भव है। अपने जीवन और शिक्षाओं के उदाहरण के माध्यम से, वे सिद्ध करते हैं कि वे आन्तरिक परिपूर्णता और प्रेम, जिन्हें हम खोजते हैं, अस्तित्व में हैं तथा उन्हें ईश्वर में प्राप्त किया जा सकता है। “महानतम प्रेम जिसे आप अनुभव कर सकते हैं, ईश्वर के साथ सम्पर्क में है,” वे दिव्य प्रेम-लीला के आरम्भिक व्याख्यान में कहते हैं कि “आत्मा और ब्रह्म के मध्य प्रेम ही परिशुद्ध प्रेम है, वह प्रेम जिसे आप सब खोज रहे हैं।”

आज हम परमहंस योगानंद जी।की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज उनका जन्म दिन है। परमहंस योगानंद (जन्म; 5 जनवरी,1893 – मृत्यु 7 मार्च, 1952) एक भारतीय और अमेरिकी हिंदू भिक्षु,योगी और गुरु थे, जिन्होंने अपने उपदेशों के प्रसार के लिए सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप (एसआरएफ)/ योगोदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया(वाईएसएस) की स्थापना की, जो एक धार्मिक ध्यान और क्रिया योग संगठन है। योग गुरु स्वामी श्री युक्तेश्वर गिरि के प्रमुख शिष्य , उन्हें उनके वंश द्वारा पश्चिम में यौगिक शिक्षाओं का प्रसार करने के लिए भेजा गया था। वे 27 वर्ष की आयु में अमेरिका चले गए। पूर्वी और पश्चिमी धर्मों के बीच एकता प्रदर्शित करने और पश्चिमी भौतिक विकास और भारतीय आध्यात्मिकता के बीच संतुलन की वकालत करने के इरादे से उन्होंने अपनी बात रखी। अमेरिकी योग आंदोलन , और विशेष रूप से लॉस एंजिल्स की योग संस्कृति पर उनके दीर्घकालिक प्रभाव के कारण योग विशेषज्ञों ने उन्हें “पश्चिम में योग का जनक” माना। उन्होंने अपने अंतिम 32 वर्ष अमेरिका में बिताए।

योगानंद अमेरिका में बसने वाले पहले भारतीय धार्मिक शिक्षकों में से एक थे, और व्हाइट हाउस में मेजबानी पाने वाले पहले प्रमुख भारतीय थे (राष्ट्रपति केल्विन कूलिज द्वारा 1927 में)। उनकी शुरुआती प्रसिद्धि के कारण लॉस एंजिल्स टाइम्स ने उन्हें “20वीं सदी का पहला सुपरस्टार गुरु” कहा ।1920 में बोस्टन पहुंचने के बाद, उन्होंने 1925 में लॉस एंजिल्स में बसने से पहले एक सफल अंतरमहाद्वीपीय भाषण यात्रा शुरू की। अगले ढाई दशकों तक, उन्होंने स्थानीय ख्याति प्राप्त की और विश्व स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाया। उन्होंने एक मठवासी व्यवस्था की स्थापना की और शिष्यों को प्रशिक्षित किया, शिक्षण यात्राओं पर गए, कैलिफोर्निया के विभिन्न स्थानों में अपने संगठन के लिए संपत्तियां खरीदीं, और हजारों लोगों को क्रिया योग में दीक्षित किया। 1952 तक, एसआरएफ के भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों में 100 से अधिक केंद्र थे। 2012 तक , उनके समूह लगभग हर प्रमुख अमेरिकी शहर में थे। उनके “सादा जीवन और उच्च विचार” के सिद्धांतों ने उनके अनुयायियों में सभी पृष्ठभूमि के लोगों को आकर्षित किया।

उन्होंने 1946 में अपनी आत्मकथा ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ प्रकाशित की , जिसे आलोचकों और व्यावसायिक रूप से खूब सराहा गया। इसकी चार मिलियन से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं, और हार्पर सैन फ्रांसिस्को ने इसे “20वीं सदी की 100 सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक पुस्तकों” में से एक बताया है। एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स ने अपनी स्मृति सभा में आने वाले प्रत्येक अतिथि को एक प्रति देने के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां मंगवाई थीं। यह एल्विस प्रेस्ली की पसंदीदा पुस्तकों में से एक थी, जिसे वे अक्सर उपहार में देते थे। पुस्तक का नियमित रूप से पुनर्मुद्रण होता रहा है और इसे “लाखों लोगों के जीवन को बदलने वाली पुस्तक” के रूप में जाना जाता है। एसआरएफ द्वारा निर्मित उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र, ‘अवेक: द लाइफ ऑफ योगानंद ‘, 2014 में रिलीज़ हुआ था। वे पश्चिमी आध्यात्मिकता में एक अग्रणी व्यक्ति बने हुए हैं। योगानंद के जीवनीकार फिलिप गोल्डबर्ग उन्हें “पश्चिम में आए सभी भारतीय आध्यात्मिक शिक्षकों में सबसे प्रसिद्ध और प्रिय” मानते हैं।

योगानंद का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक हिंदू बंगाली कायस्थ परिवार में मुकुंद लाल घोष के रूप में हुआ था। योगानंद ने क्रियायोग के जरिए लाखों शिष्यों को दुखों से पार जाकर परम ब्रह्म में लीन होने का मार्ग दिखाया था। आइए आज उनके जन्मदिन पर हम सभी परमहंस योगानंद के जीवन में गोता लगाते हैं। और यह अनुभूति करने की कोशिश करते हैं कि हम सभी पृथ्वी पर एक सपने की तरह चल रहे हैं…हमारी दुनिया एक सपने के भीतर एक सपना है।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।