Bhopal Declaration-2: दलित-आदिवासी संगठनों का साझा मंथन

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Bhopal Declaration-2: दलित-आदिवासी संगठनों का साझा मंथन

BHOPAL : भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने एक बार फिर साझा मंथन की पहल की है। इसी क्रम में सोमवार को राजधानी भोपाल में “भोपाल डिक्लेरेशन-2” के ड्राफ्टिंग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

● भोपाल डिक्लेरेशन-1 की पृष्ठभूमि
-वर्ष 2002 में हुए भोपाल डिक्लेरेशन-1 को दलित एजेंडा नाम दिया गया था, हालांकि उसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दोनों वर्गों के मुद्दे शामिल थे। इसका मूल उद्देश्य यह था कि SC-ST वर्ग के रोजगार योग्य युवाओं को नौकरियां मिलें, शासकीय खरीद में आरक्षण दिया जाए और पात्र परिवारों को भूमि पट्टे उपलब्ध कराए जाएं।

● रोजगार और पट्टों पर केंद्रित पहल
-डिक्लेरेशन-1 के तहत SC-ST वर्ग के डिग्री और डिप्लोमा धारकों को बिना टेंडर के कॉन्ट्रैक्ट देने की शुरुआत की गई थी। इससे हजारों बेरोजगार युवाओं को ठेके मिले। तीन लाख से अधिक लोगों को पट्टे बांटे गए और शासकीय जमीनों पर दबंगों के कब्जे हटाकर SC-ST वर्ग को पट्टे दिए गए। इस मॉडल को देश के कई राज्यों ने अपनाया भी।

● अब भोपाल डिक्लेरेशन-2 की बारी
-आयोजकों के अनुसार अब समय आ गया है कि बदली सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए “भोपाल डिक्लेरेशन-2” का ड्राफ्ट तैयार किया जाए। मध्य प्रदेश चैप्टर का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है। प्रथम सत्र में तय एजेंडे पर अगले चरण में पांच सौ से अधिक लोगों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी।

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● 13 जनवरी 2027 को होगा अंतिम ऐलान
-ड्राफ्टिंग प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में जिला स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे और उन्हें अंतिम दस्तावेज में शामिल किया जाएगा। साथ ही Gen-Z के साथ संवाद कर उनके विचारों और अपेक्षाओं को समझा जाएगा। पूरी प्रक्रिया के बाद 13 जनवरी 2027 को भोपाल डिक्लेरेशन-2 को अंतिम रूप देकर जारी किया जाएगा।

● किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा आयोजन
-आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। सभी राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े दलित और आदिवासी नेताओं को आमंत्रित किया गया था। भाजपा के दलित और आदिवासी वर्ग के नेताओं को भी न्योता दिया गया, हालांकि वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

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● कई संगठनों की संयुक्त पहल
-इस कार्यक्रम का संयोजन बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल और डोमा परिषद द्वारा किया जा रहा है। इनके साथ अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े देशभर के कई सामाजिक संगठन भी सहभागी हैं। ड्राफ्टिंग प्रक्रिया के तहत सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों से चरणबद्ध परामर्श लिया जा रहा है।

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● सामाजिक न्याय का भविष्यपरक रोडमैप
इस सामूहिक मंथन का उद्देश्य भोपाल डिक्लेरेशन की अब तक की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, भूमि अधिकार, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा एक साझा और भविष्यपरक एजेंडा तैयार करना है।