
असम में ज़मीन ट्रांसफर पर सख़्ती: मुस्लिम अब हिंदू की ज़मीन नहीं खरीद सकेंगे
Guwahati: असम में ज़मीन खरीद-बिक्री को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार के नए फैसले के बाद हिंदू-मुस्लिम के बीच होने वाले भूमि सौदों पर सीधी नज़र रखी जाएगी और बिना सरकारी अनुमति ऐसे ट्रांसफर अब संभव नहीं रहेंगे। इस कदम के बाद यह सवाल ज़ोर पकड़ रहा है कि क्या अब मुस्लिम हिंदू की ज़मीन नहीं खरीद सकेंगे।

राज्य में ज़मीन जैसे संवेदनशील संसाधन को लेकर सरकार ने नियंत्रण की कमान अपने हाथ में ले ली है। प्रशासन का साफ संदेश है कि अब हर सौदा केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके पीछे की मंशा, परिस्थिति और प्रभाव की भी जांच होगी।

● सरकार ने क्या बदला
असम सरकार ने अलग-अलग धर्मों के बीच होने वाले ज़मीन ट्रांसफर पर स्वतः अनुमति की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब यदि हिंदू और मुस्लिम के बीच ज़मीन का सौदा होगा, तो पहले सरकारी जांच और अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति किया गया सौदा अवैध माना जा सकता है।

● क्यों ज़रूरी समझी गई सख़्ती
सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में भूमि लेन-देन से जुड़े मामलों में सामाजिक तनाव, दबाव में सौदे, अवैध फंडिंग और बाहरी प्रभाव की शिकायतें सामने आई हैं। असम की सामाजिक संरचना और सुरक्षा को देखते हुए सरकार अब हर ऐसे सौदे को संवेदनशील मान रही है।

● नई व्यवस्था कैसे काम करेगी
अब ज़िला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां यह जांच करेंगी कि
जमीन बेचने वाला किसी दबाव में तो नहीं है।
सौदे के पीछे कोई अवैध उद्देश्य तो नहीं।
खरीद से सामाजिक संतुलन या शांति प्रभावित तो नहीं होगी।
इन बिंदुओं की समीक्षा के बाद ही सौदे को हरी झंडी मिलेगी।
● क्या यह केवल मुस्लिमों पर लागू है
सरकार का तर्क है कि यह नियम किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं बनाया गया है। यदि कोई हिंदू मुस्लिम से ज़मीन खरीदेगा, तो उस स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यानी नियम द्विपक्षीय है, लेकिन प्रभाव सबसे अधिक अंतरधार्मिक सौदों पर पड़ेगा।
● राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे धर्म के आधार पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध बता रहा है, जबकि सरकार समर्थक इसे सामाजिक शांति और राज्य हित में जरूरी कदम बता रहे हैं। कई संगठनों ने आशंका जताई है कि इससे समाज में अविश्वास बढ़ सकता है।
● जमीनी सच्चाई
असल में सरकार ज़मीन को केवल निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव से जुड़ा विषय मानकर चल रही है। यही कारण है कि अब हर सौदे को व्यापक दृष्टि से परखा जाएगा, न कि केवल कागजी औपचारिकता के रूप में।
असम में हिंदू-मुस्लिम के बीच ज़मीन ट्रांसफर पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा है, लेकिन सख़्ती इतनी बढ़ा दी गई है कि बिना सरकारी अनुमति ऐसा सौदा लगभग असंभव हो गया है। यह फैसला सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के नाम पर लिया गया है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव क्या होंगे, यह आने वाला समय तय करेगा।




