
बिहार के बाद महाराष्ट्र भी बता रहा पश्चिम बंगाल का भविष्य…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की जीत के बाद महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव भी यह बता रहे हैं कि आगामी चुनाव में पश्चिम बंगाल में
गठबंधन के साथ कमल खिलने को तैयार है। महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव में जिस तरह से ठाकरे बंधुओं की एकता चकनाचूर हो गई और पूरा विपक्ष परिदृश्य से ओझल हो रहा है, उससे यह संकेत मिल रहा है कि पश्चिम बंगाल में भी ममता का राज कंगाल हो सकता है। ठाकरे बंधुओं की एकता को तो राहुल-प्रियंका की कांग्रेस भी मुंह चिढ़ा रही है। और शिवसेना शिंदे तो मानो आईना ही दिखा रही है। हो सकता है कि नगरीय निकाय चुनाव के हालातों से सबक लेते हुए ठाकरे बंधु ऐसा कुछ करने की सोचें कि बाला साहब की इज्जत महाराष्ट्र में बनी रहे। हालांकि उम्मीद बहुत कम है कि महाराष्ट्र अब बाला साहब की तरह
उद्धव और राज की परिस्थितिजन्य एकता को अपने दिल में बसा पाएगा। खैर अब समय के साथ सच तो सभी को स्वीकारना ही पड़ेगा।
महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनावों के नतीजे आने जारी हैं। इन चुनावों में इस बार भरतीय जनता पार्टी को साफ बढ़त मिलती दिख रही है। 29 में से 20 से ज्यादा महानगरपालिकाओं में फिलहाल भाजपा को बढ़त मिल चुकी है। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी कई महानगरपालिकाओं में सीटें जुटाने में कामयाब रही है। इस चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन की एक वजह महायुति की एकजुटता, देवेंद्र फडणवीस की छवि और महाविकास अघाड़ी के बीच लगातार बढ़ती दूरियां रहीं। देवेंद्र फडणवीस इस जीत के मुख्य नायक और मुख्य केन्द्र बनकर उभरे। उन्होंने स्थानीय चुनावों को विधानसभा या संसदीय चुनावों की तरह गंभीरता से लिया और कई रैलियां कीं। उनकी रणनीति इतनी सटीक थी कि उन्होंने विपक्ष के ‘मराठी अस्मिता’ कार्ड को विफल करने के लिए एक सामरिक कदम उठाया और मुंबई में पीएम मोदी या अमित शाह जैसे केंद्रीय नेताओं को आमंत्रित नहीं किया, ताकि विपक्ष को ‘गुजरात बनाम महाराष्ट्र’ या ‘उत्तर भारत विरोधी’ अभियान चलाने का मौका न मिले। महाविकास अघाड़ी में एकजुटता की कमी थी और वे विभाजित होकर चुनाव लड़े। कांग्रेस की रणनीतिक चूक के कारण, विशेष रूप से वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ गठबंधन के मामले में, विपक्षी वोटों का भारी नुकसान हुआ। वहीं, उद्धव ठाकरे की पार्टी की नींव हिल गई थी, क्योंकि उनके कई नगर सेवक और विधायक उनका साथ छोड़ चुके थे। भाजपा ने ‘मराठी अस्मिता’ की राजनीति का मुकाबला करने के लिए हिंदुत्व के मुद्दे को समझदारी से आगे बढ़ाया, जिससे उन्हें जाति और समुदाय के विभाजन से ऊपर उठकर वोटों को एकजुट करने में मदद मिली। उद्धव ठाकरे का यह दावा कि मुंबई हमारी है, अब कमजोर पड़ गया है और मुंबई पर उनका दबदबा खत्म हो चुका है। उद्धव ठाकरे के नवनिर्वाचित पार्षद आने वाले समय में एकनाथ शिंदे गुट या भाजपा में शामिल हो जाएं, इसकी प्रबल संभावना है।
एनसीपी शरद पवार गुट की राजनीति तो मान लो महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव में औंधे मुंह पड़ी नजर आ रही है। तो बाकी सभी का हाल भी बेहाल है। विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग हो सकते हैं लेकिन नगरीय निकाय चुनावों ने मनोवैज्ञानिक तौर पर विपक्ष का मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मनोवैज्ञानिक तौर पर इसका दायरा महाराष्ट्र से बाहर दूसरे राज्यों के नेताओं और राजनीतिक दलों को भी अपनी गिरफ्त में लेता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी इससे अलग नहीं मानी जा सकती हैं। और एनडीए और मोदी-शाह की रणनीति अब विरोधियों पर लगातार शिकंजा कसती नजर आ रही है। बिहार में एनडीए सरकार बनाने के बाद महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की विजयी रणनीति यह स्थापित कर रही है कि आगामी चुनावों में भी कमल दल के विजयी अभियान पर ब्रेक लगा पाना दूसरे राजनीतिक दलों के लिए मुमकिन नहीं है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




