
‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर से 10 लाख की साइबर ठगी
खरगोन :खरगोन जिले के सनावद निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर को साइबर ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” के डर में रखकर 10 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। ठगों ने प्रोफेसर पर आतंकियों से संबंध होने का झूठा आरोप लगाकर मानसिक दबाव बनाया और रकम ट्रांसफर करा ली।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शकुंतला रुहाल ने बताया कि पीड़ित शशिकांत कुलकर्णी, जो एक पॉलिटेक्निक कॉलेज के मैकेनिकल विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष हैं, की शिकायत पर धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस और साइबर टीम गठित की गई है।
पुलिस के अनुसार, 10 जनवरी को कुलकर्णी को व्हाट्सएप पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकियों ने करीब 7 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर कार्रवाई की धमकी दी और पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया। साथ ही फोन लगातार चालू रखने का दबाव बनाया गया।
उम्र और स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली न जा पाने की बात कहने पर ठगों ने मामला “सेटल” करने का झांसा दिया और 12 जनवरी को आरटीजीएस के जरिए 10 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए। इस दौरान बैंक कर्मचारियों को लेनदेन पर संदेह हुआ और उन्होंने प्रोफेसर को सतर्क भी किया।
इसके बाद कुलकर्णी ने इंदौर में रहने वाले अपने बेटे को घटना की जानकारी दी। बेटे ने एनआईए से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि की, जहां पूरे मामले को फर्जी बताया गया। इसके बाद 15 जनवरी को सनावद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पीड़ित ने बताया कि ठगी के बाद भी आरोपियों के फोन आते रहे और और पैसों की मांग की जाती रही।
पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ है कि कुलकर्णी के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है और न ही आतंकवाद से जुड़ा कोई मामला है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या गिरफ्तारी वारंट पर बिना सत्यापन भरोसा न करें और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।





