Big decision of MP High Court:अलग रह रहा भाई सरकारी नौकरी में हो तब भी बहन को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

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Big decision of MP High Court:अलग रह रहा भाई सरकारी नौकरी में हो तब भी बहन को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

INDORE: सरकारी नौकरी में कार्यरत किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी या नहीं, इसका फैसला अब सिर्फ कागजी रिश्तों से नहीं होगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक अहम निर्णय में साफ कर दिया है कि अगर परिवार का कोई भाई सरकारी नौकरी में है लेकिन वह मृत कर्मचारी से अलग रहता है और आश्रित नहीं है, तो उसके नाम पर बहन को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति की सोच और प्रशासनिक रवैये दोनों को बदलने वाला माना जा रहा है।

● ऐतिहासिक निर्णय

यह मामला देवास स्थित बैंक नोट प्रेस के एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद परिवार पर अचानक आर्थिक संकट आ गया। कुछ समय बाद पत्नी का भी निधन हो गया, जिससे बेटी पूरी तरह अकेली रह गई। परिवार की इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने उसे अनुकंपा आधार पर जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया।

● नौकरी क्यों छीनी गई

नियुक्ति के कुछ महीनों बाद विभाग ने यह कहते हुए सेवा समाप्त कर दी कि याचिकाकर्ता का बड़ा भाई पहले से सरकारी नौकरी में है। विभाग ने बिना किसी गहन जांच के यह मान लिया कि परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित है और अनुकंपा नियुक्ति नियमों के विपरीत है।

● अदालत में क्या कहा

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि उसका भाई वर्षों से अलग रह रहा है। उसका अलग परिवार है, अलग खर्च है और वह न तो पिता पर कभी आश्रित रहा और न ही बहन के जीवन यापन में कोई भूमिका निभा रहा है। सिर्फ भाई होने और सरकारी नौकरी में होने से उसे परिवार का सहारा मान लेना सच्चाई से परे है।

● हाई कोर्ट की सीधी और दो टूक टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मकसद मृत कर्मचारी के परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है, न कि यह गिनती करना कि परिवार में कितने लोग नौकरी में हैं। यदि कोई सदस्य अलग रहता है और आश्रित नहीं है, तो उसका सरकारी सेवा में होना परिवार की आर्थिक स्थिति को स्वतः मजबूत नहीं बनाता।

● विभागीय रवैये पर कड़ा रुख

कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना किसी विधिवत जांच, तथ्यों के परीक्षण और वास्तविक पारिवारिक स्थिति को समझे सेवा समाप्त करना प्रशासनिक लापरवाही है। सिर्फ फाइलों में दर्ज रिश्ते के आधार पर किसी का भविष्य तय नहीं किया जा सकता।

● क्या आदेश दिया गया

हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए बहन को पद पर बहाल करने के निर्देश दिए। साथ ही सेवा में निरंतरता, बर्खास्तगी अवधि का वेतन और सभी परिणामी लाभ देने का आदेश भी पारित किया गया।

● इस फैसले का दूरगामी असर

यह फैसला उन हजारों मामलों के लिए नजीर बनेगा, जहां सिर्फ यह कहकर अनुकंपा नियुक्ति रोकी जाती रही कि परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी है। अब विभागों को यह साबित करना होगा कि वह कर्मचारी वास्तव में परिवार का सहारा है या नहीं।

● कोर्ट का साफ संदेश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति नियमों की किताब से नहीं, परिवार की जमीनी हकीकत से तय होगी। कानून का उद्देश्य संवेदनहीन प्रशासन नहीं, बल्कि संकट में फंसे परिवार को न्याय देना है।