
माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना: मौन व्रत और अन्न-जल त्याग, सम्मानपूर्वक प्रोटोकॉल की मांग पर अड़े
Prayagraj: प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम स्नान को आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद के बाद स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। शंकराचार्य अपने शिविर में धरने पर बैठे हैं और उन्होंने मौन व्रत धारण कर अन्न-जल का त्याग कर दिया है। उनके शिष्य और समर्थक भी शिविर में मौजूद हैं और भजन-कीर्तन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, रविवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में संगम स्नान के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए उनकी पालकी को रोक दिया और पैदल संगम जाने को कहा। शिष्यों ने इसका विरोध किया और पालकी लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
● शिष्यों की हिरासत और मारपीट के आरोप
घटना के दौरान पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। संतों की ओर से आरोप लगाया गया कि एक साधु के साथ चौकी में मारपीट की गई। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और उन्होंने शिष्यों को रिहा कराने की मांग पर अड़ गए। अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, हाथ जोड़कर बातचीत भी की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। करीब दो घंटे तक मौके पर गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।
● पालकी क्षतिग्रस्त, संगम स्नान नहीं हो सका
बताया गया कि पुलिस द्वारा पालकी को खींचते हुए संगम से करीब एक किलोमीटर दूर ले जाया गया, इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। पूरे घटनाक्रम के कारण शंकराचार्य संगम स्नान नहीं कर सके।
● धरने पर बैठे शंकराचार्य, मौन व्रत जारी
इस घटनाक्रम से आहत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया है और किसी से बातचीत नहीं कर रहे। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रशासन उन्हें सम्मानपूर्वक प्रोटोकॉल के साथ संगम तक नहीं ले जाता, तब तक वे धरनास्थल से नहीं उठेंगे और गंगा स्नान भी नहीं करेंगे।
● प्रशासन और संत समाज के बीच गतिरोध
माघ मेले जैसे अत्यंत संवेदनशील और श्रद्धालुओं से भरे आयोजन में यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और संत समाज के सम्मान से जुड़े सवाल खड़े कर रही है। एक ओर प्रशासन भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं संत समाज इसे धार्मिक गरिमा और परंपरा से जुड़ा विषय बता रहा है।
फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन शंकराचार्य का धरना और मौन व्रत जारी रहने से प्रशासन के सामने संवाद और समाधान की बड़ी चुनौती बनी हुई है।





