50 paise tea to an empire worth crores: चेन्नई की पैट्रिसिया नारायण की संघर्ष गाथा

73

50 paise tea to an empire worth crores: चेन्नई की पैट्रिसिया नारायण की संघर्ष गाथा

CHENNAI: चेन्नई की पैट्रिसिया नारायण की कहानी संघर्ष, आत्मनिर्भरता और अटूट संकल्प की मिसाल है, जिसने अपने जीवन के कठिन दौर को ही सफलता की डगर बना दिया। पैट्रिसिया की यात्रा एक छोटे से मरीना बीच के खोखे से शुरू हुई और आज ‘Sandeepha Restaurants’ नामक रेस्तरां चेन तक पहुंची, जो रोज़गार और रसोई के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है।

 

● असफल विवाह के बाद ज़िम्मेदारी का संघर्ष

पैट्रिसिया का जन्म तमिल नाडु के नागरकोइल में एक परंपरागत परिवार में हुआ। कॉलेज के दिनों में उन्होंने 17 की उम्र में प्रेम विवाह किया, लेकिन विवाह जल्दी ही कठिनाईयों में बदल गया। उनके पति नशे के आदी थे और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। एक ऐसे दौर में जब समर्थन का सहारा नहीं था, पैट्रिसिया ने अपने दो बच्चों के साथ अपने पेरेंट्स के आशियाने में लौटकर जीवन का संघर्ष नए सिरे से शुरू किया।

IMG 20260119 WA0162

● स्वाद और कुकिंग से पहली कमाई

ज़िंदगी की नई शुरुआत में पैट्रिसिया ने घर पर अचार, जैम और स्क्वाश जैसी चीज़ें बनाना शुरू किया और उधार लिए धन से उन्हें बाजार में बेचकर पहली बार आय हासिल की। यही शुरुआती क़दम उनके व्यवसाय की नींव साबित हुआ।

● मरीना बीच पर खोखे से व्यावसायिक शुरुआत

1980 के दशक में उन्होंने चेन्नई के मरीना बीच पर एक छोटे से खोखे में चाय, कॉफी, समोसे और कटलेट जैसे व्यंजन बेचना शुरू किया। शुरुआत में उनकी पहली कमाई सिर्फ 50 पैसे की एक कप कॉफी से हुई थी, लेकिन इसी एक कप ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

● सफलता की ओर उठते कदम

पैट्रिसिया की मेहनत और गुणवत्ता ने ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने चेन्नई के कई सरकारी और कॉर्पोरेट कैंटीनों के लिए कैटरिंग का ठेका हासिल किया। उनमें से कुछ प्रमुख अवसरों में स्लम क्लियरेंस बोर्ड, बैंक ऑफ मदुरा और नेशनल पोर्ट ट्रस्ट मैनेजमेंट स्कूल शामिल हैं, जहाँ उन्होंने सैकड़ों बच्चों और कर्मचारियों के लिए खाना प्रदान किया।

● व्यक्तिगत त्रासदी से व्यवसाय की ओर

1998 में रेस्तरां व्यवसाय में और विस्तार करते हुए पैट्रिसिया ने चेन “Sandeepha” की नींव रखी। 2004 में जीवन का सबसे बड़ा सदमा तब आया जब उनकी बेटी और दामाद एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। इस गहरे आघात के बाद कुछ समय के लिए वह व्यवसाय से दूर रहीं, लेकिन अपने बेटे के समर्थन से वापस लौटते हुए उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर रेस्टोरेंट चेन Sandeepha को और मजबूती से खड़ा किया।

● उपलब्धियां और समाज में योगदान

अभी Sandeepha चेन चेन्नई के कई आउटलेट्स में सफलतापूर्वक चल रही है और रोज़ लगभग ₹2 लाख तक का राजस्व दर्ज कर रही है। उनके रेस्तरां में अब करीब 200 से अधिक लोग कार्यरत हैं और व्यवसाय लगातार विस्तार की राह पर है।

● पुरस्कार

उनकी कहानी के लिए FICCI ने उन्हें “Woman Entrepreneur of the Year” का पुरस्कार भी दिया है, जो उनके समर्पण और परिश्रम का प्रतिफल है।

● सीख और प्रेरणा

पैट्रिसिया नारायण की यात्रा यह संदेश देती है कि जीवन में कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर आत्मविश्वास और संकल्प मजबूत हो, तो व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को भी अवसर में बदल सकता है। उनके जीवन से यह स्पष्ट होता है कि सफलता सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष को पार करने की लगातार कोशिश है।