Indore Christian College Land Dispute: 500 करोड़ रुपये का जमीन विवाद- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, अब फैसला कलेक्टर कोर्ट में

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Indore Christian College Land Dispute: 500 करोड़ रुपये का जमीन विवाद- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, अब फैसला कलेक्टर कोर्ट में

इंदौर: इंदौर के प्रतिष्ठित क्रिश्चियन कॉलेज की लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक चरण में पहुँच गया है। उच्च न्यायालय और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कॉलेज प्रबंधन की याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया है, जिससे विवाद अब सीधे कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिया गया है।

 

*सुप्रीम कोर्ट से कॉलेज को झटका*

क्रिश्चियन कॉलेज प्रबंधन पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर रहा था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने यह याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भूमि से जुड़े कारण बताओ नोटिस और उससे जुड़े निर्णय को कलेक्टर या सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष पूरी प्रक्रिया के बाद ही तय किया जाएगा, न कि कोर्ट द्वारा सीधे।

 

*क्या था विवाद?*

इंदौर कलेक्टर ने कॉलेज को नोटिस जारी कर पूछा था कि विवादित जमीन को सरकारी भूमि क्यों न घोषित किया जाए।

प्रशासन ने इस जमीन पर किसी भी नक्शा (TP/NC) पास करने से रोक लगा दी थी।

कॉलेज प्रबंधन यह नक्शा व्यावसायिक/अन्य उपयोग के लिए कराने की कोशिश कर रहा था, जिससे विवाद गहराया।

जमीन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कलेक्टर की जांच में सामने आया कि जमीन 1 दिसंबर 1887 को महाराजा होलकर ने शर्तों के साथ दान (अनुदान) में दी थी। शर्तें थीं कि जमीन केवल शैक्षिक संस्थान और महिला अस्पताल के लिए उपयोग की जाएगी। यदि ये उद्देश्य समाप्त हो जाएँ या शर्तें पूरी न हों, तो जमीन वापस ली जा सकती है।

जांच में यह भी पाया गया कि: महिला अस्पताल का संचालन अब नहीं हो रहा। कुछ हिस्सों में व्यावसायिक उपयोग के प्रयास देखे गए।

 

*प्रबंधन का विरोध*

कॉलेज प्रबंधन का कहना रहा है कि नोटिस सिर्फ औपचारिक है और उन्हें उचित मौका नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन पहले ही अपना निर्णय बना चुका है।

 

*अब आगे क्या होगा?*

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों से राहत न मिलने के बाद मामला अब कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा गया है।

कलेक्टर/सक्षम अधिकारी सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार अंतिम फैसला करेंगे कि जमीन कॉलेज के पास रहे या सरकार के नाम दर्ज हो।

*स्थिति का मतलब*

यह विवाद अब न्यायिक समीक्षा से बाहर निकल कर प्रशासनिक निर्णय के स्तर पर पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने साफ कर दिया है कि सरकारी अनुदान की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं — इसका निर्णय पहले कलेक्टर स्तर पर किया जाएगा।