
Karnataka Senior IPS viral video: डीजीपी रैंक अधिकारी निलंबित
Bengaluru : कर्नाटक पुलिस विभाग अचानक से गंभीर विवाद और हड़कंप का शिकार हो गया है जब एक वरिष्ठ IPS अधिकारी का कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। मामला डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (Civil Rights Enforcement) पद पर तैनात डॉ. के. रामचंद्र राव से जुड़ा हुआ है, जिनके कथित तौर पर एक सरकारी दफ्तर के भीतर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए सामने आने के बाद प्रशासन ने उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया है और जांच प्रक्रिया तेज़ कर दी है।
▪️ अधिकारी की छवि पर बड़ा आघात
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई क्लिप्स और फुटेज वायरल हुए जिसमें कथित रूप से डीजीपी राव वर्दी में कार्यालय में मौजूद रहते हुए महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे हैं। इन वीडियोज़ में अधिकारी को अलग-अलग महिलाओं के साथ मजबूती से गले मिलते और उन्हें चूमते हुए देखा जा सकता है, जिससे विभागीय गरिमा और सरकारी कार्यालय की छवि को बड़ा आघात महसूस हो रहा है। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और संदर्भ अभी स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है और यह भी माना जा रहा है कि कुछ फुटेज पुरानी रिकॉर्डिंग हो सकती है।
▪️ तत्काल एक्शन: निलंबन और जांच
कर्नाटक सरकार ने तेज़ गति से प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रामचंद्र राव को निलंबित कर दिया है और वीडियो की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वीडियो को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि कानून के सामने कोई भी अधिकारी बड़ा नहीं है और अगर साबित होता है कि उन्होंने कर्तव्य के दौरान अनुचित या अनैतिक हरकत की है, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
▪️ रामचंद्र राव का आरोप : वीडियो ‘झूठा और फ़र्जी’
स्वयं वरिष्ठ IPS अधिकारी रामचंद्र राव ने इन आरोपों का खंडन किया है और दावा किया है कि वायरल वीडियो “गढ़ा हुआ, झूठा और मनगढ़ंत” है। उनके बयान के अनुसार, यह फुटेज संभवतः पुराने समय का है, जब वे बेलगावी में तैनात थे और उन्होंने कहा कि इस तरह की क्लिप्स आज की तकनीक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से भी बनाई जा सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस संबंध में कानूनी सलाह लेकर कार्रवाई करेंगे।
▪️ राज्य में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर कर्नाटक राज्य की राजनीति में भी काफ़ी हलचल है। विपक्षी दलों ने सरकार के समक्ष मांग रखी थी कि आरोपित अधिकारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित करना चाहिए और पूर्ण जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। कुछ नेताओं ने कहा कि ऐसी किसी भी गलती की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर जब मामला पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग का हो। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो।
▪️ पुलिस की प्रतिष्ठा पर सवाल
यह विवाद कर्नाटक पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तकनीकी और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस यह है कि पुलिस सर्विस में शामिल अधिकारियों की नैतिकता और जवाबदेही की क्या सीमाएं निर्धारित हैं और क्या सार्वजनिक पद पर अनुचित आचरण विभाग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
▪️ पूर्व विवाद भी उभर रहा है : बेटी का गोल्ड स्मगलिंग मामला
यह पहला विवाद नहीं है जिसमें रामचंद्र राव का नाम सुर्खियों में आया है। इससे पहले उनकी बेटी रान्या राव को सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिससे विभाग में पहले भी आलोचनाएं हुई थीं। उस प्रकरण में भी रामचंद्र राव को अनिवार्य अवकाश पर भेजा गया था और बाद में पुनः सेवा में बहाल किया गया था।
▪️ जांच की दिशा और संभावित कार्रवाई
अब प्रशासन और गृह विभाग वीडियो की सत्यता, स्रोत, समय और संदर्भ की तकनीकी जांच कर रहा है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी तरह का दुरुपयोग, दबाव या ब्लैकमेल प्रयास वीडियो को सार्वजनिक करने में शामिल था। यदि जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो केवल निलंबन ही नहीं बल्कि अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
▪️और अंत में••••
कर्नाटक के वरिष्ठ IPS अधिकारी के कथित आपत्तिजनक वीडियो की जांच अब राज्य के पुलिस विभाग, प्रशासन और राजनीति के लिए सबसे बड़ा परीक्षण बन चुकी है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की छवि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस के भीतर नैतिकता, जवाबदेही और कर्तव्य की सीमाओं पर एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। जांच के नतीजों का इंतज़ार अब पूरे प्रदेश और देश की निगाहों के बीच है।





