शासन का जवाब आने तक होल्कर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य बनी रहेंगी डॉ अनामिका जैन

हाईकोर्ट ने शासन को जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया

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शासन का जवाब आने तक होल्कर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य बनी रहेंगी डॉ अनामिका जैन

कीर्ति राणा की विशेष रिपोर्ट 

इंदौर। होल्कर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ अनामिका जैन का ट्रांसफर शाजापुर कॉलेज में प्राध्यापक के पद पर किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट इंदौर की युगल पीठ ने राज्य शासन को जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

इस आदेश से डॉ जैन को छह सप्ताह के लिए फिलहाल राहत मिल गई है, तब तक वे प्रभारी प्राचार्य के पद पर बनी रहेंगी।

🔹एकल पीठ द्वारा निरस्त याचिका को डबल बैंच में दी थी चुनौती

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ में डॉ जैन के वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागड़िया और विवेक फड़के द्वारा दायर याचिका में कहा था कि वर्ष 1985 में उनकी नियुक्ति रसायन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक के रूप में हुई थी। वर्ष 2006 में उन्हें प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया था। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस योजना के तहत शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। डा. जैन ने आवेदन किया और चयनित हुईं। आठ नवंबर 2024 को उन्हें प्रभारी प्राचार्य बनाया गया। बाद में तीन जून 2025 को उन्हें बीकेएसएन शासकीय कालेज, शाजापुर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 12 सितंबर 2025 को सक्षम प्राधिकारी ने आदेश पारित कर डा. जैन को प्रभारी प्राचार्य के बजाय- अपने मूल पद प्रोफेसर पर कार्य करने के निर्देश दिए। इसे चुनौती देते हुए डा. जैन ने हाई कोर्ट की एकल पीठ में न्यायमूर्ति जेके पिल्लई के समक्ष याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। डा. जैन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया के माध्यम से एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी है। अपील की सुनवाई के दौरान एडवोकेट बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि एकल पीठ के आदेश के बाद अब तक कालेज में किसी प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हुई है। एकल पीठ ने भी याचिका की सुनवाई के दौरान डा. अनामिका जैन के पद पर बने रहने के संबंध में अंतरिम आदेश जारी किया था। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने राज्य शासन से इस संबंध में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

🔹सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं

होल्कर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ अनामिका जैन जिस तरह न्यायालय में अपने अधिकार के लिये संघर्ष कर रही हैं तो उनके मामले में ‘सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं’ वाली कहावत सही सिद्ध होती नजर आती है।

शासन द्वारा तय मानदंडों की पूर्ति करने के बाद उन्हें प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया था। नियमों के पालन में सख्ती के चलते होल्कर कॉलेज की छवि तो निखरी लेकिन अभाविप से जुड़े कतिपय छात्रों द्वारा कॉलेज स्टॉफ को कमरे में बंद करने, भयभीत करने जैसे हालात के बाद भी डॉ जैन ने सख्त रवैया अपना रखा। नतीजा यह हुआ कि उनका तबादला शाजापुर के कॉलेज में प्राध्यापक के पद पर कर दिया गया।

इस आदेश के खिलाफ उन्होंने कोर्ट की शरण ली तो पहला स्टे मिला। फिर एकल पीठ में न्यायमूर्ति पिल्लई के यहा लगी याचिका में उन्होंने अपना पक्ष रखा किंतु याचिका खारिज करने के साथ ही निर्णय का अधिकार शासन को दे दिया। इस आदेश को उन्होंने डबल बैंच में चुनौती दी, अब शासन को छह सप्ताह में जवाब देने को कहा है।