मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करते कैलाश, मोहन, भगवान और नारायण…

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मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करते कैलाश, मोहन, भगवान और नारायण…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म अवार्ड्स की घोषणा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इसे अलग-अलग सरकारों में विचारधाराओं से भी जोड़ा जाए, तब भी पद्मश्री हासिल करने वाले व्यक्तित्व जीवन के कठिन दौर से गुजर कर आते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 76वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 की पूर्व संध्या पर 5 हस्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान से विभूषित करने की घोषणा की है। इनमें मध्य प्रदेश की 4 हस्तियां शामिल हैं। इनमें साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार और पुरातत्वविद नारायण व्यास को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। इन सभी चेहरों ने मध्य प्रदेश को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है। आइए इन सभी व्यक्तित्व पर थोड़ी सी नजर डालते हैं।

कैलाश चंद्र पंत को साहित्य एवं शिक्षा, मोहन नागर को समाज सेवा, भगवानदास रैकवार को खेल (मार्शल आर्ट) और नारायण व्यास को पुरातत्व क्षेत्र से सम्मान के लिए चुना गया है।

वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और सांस्कृतिक चिंतक कैलाश चंद्र पंत को 90 वर्ष की आयु में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। आर्य समाज इनकी संस्कार भूमि रही है। वह स्कूल के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। 14 जनवरी 1949 को एक सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तारी भी दी। तब उनकी उम्र 13 साल ही थी। कोर्ट में पेशी के बाद जज साहब ने 2 महीने की सख्त सजा दे दी। हालांकि जेल पहुंचने के दो-तीन घंटे बाद उन्हें बरी कर दिया गया था। पंत हिन्दी-साहित्यकार, पत्रकार एवं प्रमुख हिन्दीसेवी हैं। उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब नौकरी छोड़कर स्वतंत्र प्रेस डाला और साप्ताहिक पत्र ‘जनधर्म’ निकाला।

मोहन नागर को पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए पद्मश्री दिया जा रहा है। मोहन नागर को पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए काम के लिए यह सम्मान मिला है। मोहन नागर के द्वारा शुरू किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक जनआंदोलन के रूप में उभरा। 58 वर्षीय मोहन नागर को आदिवासियों की मदद और जल संरक्षण के लिए ‘जल पुरुष’ कहा जाता है। मोहन नागर पिछले तीन दशक से बैतूल स्थित भारत भारती शिक्षा संस्थान से जुड़े हैं। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद में उपाध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और सामाजिक चेतना से संबंधित कई नवाचार चल रहे हैं।

सागर के भगवान दास रैकवार को अखाड़ा संस्कृति की प्राचीनतम युद्ध शैली के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। 83 वर्षीय रैकवार ने 6 साल की उम्र में परिवार और गुरु के कहने पर अखाड़ा खेलना शुरू किया था। फिर इसे ही आत्मा बना लिया। समय कम पड़ने पर 1998 में बैंक की नौकरी से त्यागपत्र देकर पूरा समय अखाड़े को समर्पित कर दिया। भगवानदास रैकवार को बुंदेली अखाड़ा (पारंपरिक मार्शल आर्ट) के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। वे बुंदेलखंड में स्नेहपूर्वक ‘दाऊ’ के नाम से पहचाने जाते हैं और बुंदेली संस्कृति के जीवंत प्रतीक माने जाते हैं। उनके शिष्य पूरे देश में फैले हैं। उनकी एक शैली बंदिश है। इसमें वे रस्सी, तार की तरह किसी भी व्यक्ति को लट्‌ठ से बांध देते थे। वह तब तक नहीं छूट पाता था, तब तक वह स्वयं न खोलें।

नारायण व्यास 2009 में रिटायर होने के बाद भी पुरातत्व के लिए काम कर रहे हैं। वह पुरातत्व, मूर्तिकला और चित्रकला के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढ़ी देश की धरोहरों के बारे में जाने और इन्हें संरक्षित करें। उनका मानना है कि शासन तो इनके लिए काम करता ही है लेकिन लोगों की भी जिम्मेदारी है कि इन्हें सुरक्षित रखें। उन्होंने भीमबेटका, रानी की वाव और सांची स्तूपों जैसी यूनेस्को विश्व धरोहर साइट्स के संरक्षण में योगदान दिया है।

निश्चित तौर से यह सभी मध्य प्रदेश की वह महत्वपूर्ण हस्तियाँ हैं जिनके काम को हमेशा सम्मान की नजर से देखा जाएगा। अपने-अपने क्षेत्र में पूरा जीवन समर्पित करने वाले यह व्यक्तित्व न केवल मध्यप्रदेश को गौरवान्वित कर रहे हैं बल्कि यह मध्य प्रदेश की धरोहर हैं, प्रेरणा स्रोत हैं और मार्गदर्शक भी हैं। केंद्र सरकार ने इनके काम को सम्मान देकर पूरे मध्यप्रदेश को सम्मानित किया है।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।