
रायपुर साहित्य उत्सव: समकालीन महिला लेखन पर सार्थक परिचर्चा,महिला लेखन समाज में सकारात्मक बदलाव का बन रहा सशक्त माध्यम- डॉ स्वाति तिवारी
रायपुर: रायपुर साहित्य उत्सव में लाला जगदलपुरी मण्डप में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में “समकालीन महिला लेखन” विषय पर गहन एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई। इस सत्र में कहानीकार सुश्री इंदिरा दांगी, सुश्री श्रद्धा थवाईत, सुश्री जया जादवानी तथा सुश्री सोनाली मिश्र ने सहभागिता करते हुए महिला लेखन की बदलती भूमिका और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

सर्व प्रथम सूत्रधार वरिष्ठ कथाकार डॉ स्वाति तिवारी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि स्त्री के अस्तित्व और अस्मिता के साथ उसकी अभिव्यक्ति के संघर्ष की यह मुठभेड़ एक लंबी यात्रा है जिसका समकालीन पड़ाव अब मुख्य धारा के साहित्य के समानांतर आ गया है। क्योंकि यह अनुमान पर नहीं अनुभवों पर आधारित है।अपने लिखे साहित्य को यथार्थ के धरातल पर लाकर समकालीन महिला लेखिकाओं ने यह साबित कर दिया कि वे हर विषय पर लिख सकती है।

परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन अब भावनाओं की अभिव्यक्ति के साथ ही समाज के यथार्थ, संघर्ष, असमानताओं और संवेदनाओं को सशक्त रूप में सामने लाने का माध्यम बन चुका है। आज का स्त्री लेखन आत्मकथात्मक होने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन को भी प्रतिबिंबित कर रहा है, जो पाठक को सोचने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित करता है।

परिचर्चा के दौरान महिला सशक्तिकरण, समानता, सामाजिक न्याय और बदलते पारिवारिक व सामाजिक ढांचे जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि महिला लेखन ने साहित्य में नई भाषा, नए अनुभव और नए सरोकार जोड़े हैं, जिससे साहित्य अधिक समावेशी और यथार्थपरक बना है।
वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है। यह न केवल स्त्री अनुभवों को स्वर देता है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करता है। साथ ही महिला लेखन भारतीय साहित्य को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई दिशा प्रदान कर रहा है।




