Reel Queen of Barmer: DM टीना डाबी का वीडियो वायरल, सलामी को लेकर उठा बड़ा सवाल

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Reel Queen of Barmer: DM टीना डाबी का वीडियो वायरल, सलामी को लेकर उठा बड़ा सवाल

BARMER: राजस्थान के बाड़मेर जिले की कलेक्टर और यूपीएससी टॉपर आईएएस टीना डाबी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ा एक वायरल वीडियो है, जिसमें ध्वजारोहण के बाद उनके सलामी देने के तरीके ने नई बहस छेड़ दी है।

झंडे की जगह नेताओं को सलामी देने का दृश्य

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ध्वजारोहण के बाद डीएम टीना डाबी सीधे मंच की ओर मुड़कर वहां मौजूद जनप्रतिनिधियों और नेताओं को सलामी देती हैं। कुछ सेकंड बाद मंच के पास खड़े एक पुलिस कर्मचारी के इशारे पर वह अचानक पीछे मुड़ती हैं और फिर राष्ट्रीय ध्वज की ओर सलामी देती हैं। यही दृश्य अब सोशल मीडिया पर बहस और आलोचना का विषय बना हुआ है।

सोशल मीडिया पर उठे तीखे सवाल

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई। यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह प्रोटोकॉल और संवैधानिक मर्यादाओं का स्वतः पालन करे। कई लोगों ने इसे प्रतीकात्मक चूक बताया, तो कुछ ने इसे सत्ता और सफेदपोश राजनीति के प्रति कथित झुकाव से जोड़ दिया।

● दस साल की फील्ड पोस्टिंग के बाद भी चूक

टीना डाबी 2015 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और उन्हें फील्ड में लगभग एक दशक का अनुभव है। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि यह किसी नए अधिकारी की भूल नहीं मानी जा सकती। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक प्रशिक्षण और कोचिंग सिस्टम में अधिकारियों को सत्ता संरचना के प्रति ज्यादा सजग और संवैधानिक प्रतीकों के प्रति कम संवेदनशील बनाया जा रहा है।

रील संस्कृति और प्रशासनिक गरिमा पर बहस

टीना डाबी पहले भी सोशल मीडिया और रील्स को लेकर चर्चा में रही हैं। समर्थक इसे आधुनिक प्रशासनिक संवाद बताते हैं, जबकि आलोचक इसे प्रशासनिक गरिमा से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। ताजा वीडियो ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या अफसरशाही में लोकप्रियता और दृश्य प्रभाव, संवैधानिक अनुशासन से ऊपर हो रहा है।

प्रोटोकॉल क्या कहता है

सरकारी समारोहों में ध्वजारोहण के बाद प्रथम सलामी राष्ट्रीय ध्वज को दी जाती है। इसके बाद ही मंच, अतिथियों या परेड का अभिवादन किया जाता है। वायरल वीडियो में क्रम उलटा दिखाई देता है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल क्षणिक चूक थी या मानसिक प्राथमिकताओं का संकेत।

प्रशासन की ओर से अब तक सफाई नहीं

इस पूरे मामले पर न तो जिला प्रशासन की ओर से और न ही स्वयं आईएएस टीना डाबी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और व्याख्याओं ने विवाद को और हवा दे दी है।

सवाल केवल एक अधिकारी का नहीं

यह मामला केवल एक अधिकारी की गलती या चूक तक सीमित नहीं है। यह उस पूरी प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, जहां संवैधानिक मूल्यों, प्रतीकों और सत्ता के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासनिक सेवा की बुनियादी शर्त मानी जाती है।