Three Families Donate Eyes of Deceased Relatives Together छः नेत्रहीनों को मिलेगा नया जीवन!

नेत्रम संस्था के सदस्यों के प्रयास बने समाज के लिए प्रेरणा!

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Three Families Donate Eyes of Deceased Relatives Together छः नेत्रहीनों को मिलेगा नया जीवन!

 

Ratlam : शहर में नेत्रम संस्था के सदस्यों के प्रयासों से नेत्रदान के ग्राफ में दिन ब दिन इजाफा हो रहा हैं। इन 3 परोपकारी परिवारों के साहसिक और उदार निर्णय से अब छः नेत्रहीनों को नई दृष्टि मिलने की आशा जगी हैं जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बना हैं। नेत्रम संस्था के सदस्य समाजसेवी हेमन्त मूणत ने बताया कि शहर के बजाजखाना निवासी कांतिलाल चोपड़ा के निधन के पश्चात उनके पुत्र संजय, पंकज चोपड़ा एवं परिजनों ने शीतल भंसाली की प्रेरणा से नेत्रदान का निर्णय लिया।
इसी क्रम में स्टेशन रोड निवासी हंसमुख भाई पटेल के निधन उपरांत समाजसेवी भाई सुधीर पटेल एवं परिजनों ने सुशील मीनु माथुर की प्रेरणा से परिजनों ने नेत्रदान की सहमति दी। वहीं शहर की भरावाकुई निवासी नरेन्द्र कुमार के निधन के बाद भाई संजय, सुपुत्र कमल भंडारी एवं परिजनों ने प्रोफेसर मनोहर जैन, नरेन्द्र छाजेड़ (उज्जैन वाला), यशवंत पावेचा एवं हितेश पारख की प्रेरणा से नेत्रदान हेतु स्विकृति प्रदान की।

बता दें कि प्रथम नेत्रदान हेतु परिजनों की सहमति मिलते ही नेत्रम संस्था द्वारा बड़नगर स्थित गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी एल ददरवाल को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वे मनीष तलाच, परमानंद राठौड़ एवं मोहनलाल राठौड़ के साथ रतलाम पहुंचे और नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
द्वितीय एवं तृतीय नेत्रदान के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई। उनके निर्देश में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाह, हेमलता कुंवर, सोलंकी मैम, कालू वसुनिया एवं गोविन्द राव के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। नेत्रदान टीम को दिवंगतों के निवास स्थान तक ले जाने एवं पुनः मेडिकल कॉलेज पहुंचाने की संपूर्ण व्यवस्था शलभ अग्रवाल एवं यशवंत पावेचा के सहयोग से की गई।

नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान परिवारजन, रिश्तेदार, मित्र एवं शुभचिंतक मौजूद रहें। उन्होंने स्वयं पूरी प्रक्रिया को देखा, नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया तथा भविष्य में इस पुण्य कार्य से जुड़ने का संकल्प लिया। हेमन्त मूणत, नवनीत मेहता, ओमप्रकाश अग्रवाल, शीतल भंसाली, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनु माथुर, प्रशांत व्यास, प्रोफेसर मनोहर जैन, जे.के. जैन, चेतन पटेल, प्रदीप जैन, पीयूष अग्रवाल सहित अनेक जागरूक नागरिक सक्रिय रूप से मौजूद रहेंनेत्रम संस्था द्वारा तीनों परोपकारी परिवारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा उनके इस मानवीय योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संस्था ने समाज से अपील की हैं कि नेत्रदान जैसे महादान को अपनाकर किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है और इस पुण्य कार्य को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया जा सकता हैं!