मेघनगर में अवैध गौकशी और वन अतिक्रमण: प्रशासन की कार्रवाई के बीच सवाल बरकरार

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मेघनगर में अवैध गौकशी और वन अतिक्रमण: प्रशासन की कार्रवाई के बीच सवाल बरकरार

राजेश जयंत

JHABUA : मध्य प्रदेश के पश्चिम सीमांत जनजातीय बहुल झाबुआ जिले के ग्राम सजेली नान्यासाथ में अवैध गौकशी और वन भूमि अतिक्रमण की घटना ने प्रशासन की सतर्कता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फॉरेस्ट बीट क्रमांक 75 के जंगल में गोवंश वध के आरोपियों के खिलाफ थाना मेघनगर में अपराध क्रमांक 287/06.12.2025 दर्ज किया गया। इसमें कुल 23 आरोपी शामिल पाए गए, जिनमें से 18 को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रत्येक पर 10,000/- रुपये का ईनाम घोषित किया गया है।

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पुलिस और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों के बावजूद विशेषज्ञ और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है या केवल सतही रोकथाम है।

▪️वन विभाग की कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया

वन विभाग ने 0.475 हेक्टेयर से लेकर 1.5 हेक्टेयर तक विभिन्न वन भूमि पर किए गए कुल 9 अतिक्रमण प्रकरणों में विधिसम्मत कार्रवाई की। दिनांक 14 दिसम्बर 2025 को ग्राम सजेली नान्यासाथ में अतिक्रमण हटाया गया। 22 जनवरी 2026 को प्रशासन और फॉरेस्ट विभाग ने पुनः सभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इसी दौरान बिजली विभाग ने अवैध बिजली कनेक्शन काटकर भविष्य में किसी तरह की पुनरावृत्ति रोकने का काम किया।

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▪️प्रशासन ने बनाई विशेष निगरानी टीम

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई है। एसडीओपी थांदला के नेतृत्व में यह टीम सुनिश्चित कर रही है कि गौकशी की कोई घटना न हो। नाईट विजन कैमरे, ड्रोन और उड़नदस्ता टीम के जरिए जंगल और आसपास के ग्रामों में लगातार निगरानी की जा रही है। सतर्कता के लिए अस्थायी पेट्रोलिंग चौकियां बनाई गई हैं। वनमंडलाधिकारी ने बताया कि पूरे क्षेत्र में तार फेंसिंग और गो अभ्यारण बनाने की दीर्घकालिक योजना प्रस्तावित है।

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▪️सवाल उठ रहे हैं – क्या रुक पाएगी घटना की पुनरावृत्ति?

स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरण विशेषज्ञ सवाल कर रहे हैं कि क्या प्रशासन की यह कार्रवाई पर्याप्त है। क्या केवल गिरफ्तारी और अतिक्रमण हटाने से वास्तविक नियंत्रण आ गया है? अवैध गौकशी और वन भूमि अतिक्रमण के पीछे व्यापक नेटवर्क और अवैध मांस व्यापार जैसी गतिविधियां अभी भी जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सतत निगरानी और पेट्रोलिंग से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय स्थायी समाधान और सामाजिक जागरूकता भी पैदा की जाए।

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▪️प्रशासन का दावा और निगरानी का दायरा

प्रशासन का दावा है कि दिनांक 06 दिसम्बर 2025 से अब तक सजेली नान्यासाथ और आसपास के गांवों में कोई नई गौकशी की घटना नहीं हुई है। वेटनरी विभाग के डॉक्टरों द्वारा मवेशी अवशेषों की जांच कर ली गई है।
राजस्व, पुलिस और वन विभाग की टीम नियमित जागरूकता बैठकें कर रही है और लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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▪️कार्रवाई तो हुई, लेकिन क्या समस्या पर अंकुश?

सजेली नान्यासाथ का मामला यह दिखाता है कि प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है और निगरानी भी बढ़ा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तविक नियंत्रण में है या केवल अपराधियों को गिरफ्तार करके अस्थायी समाधान प्रस्तुत कर रहा है? क्या अवैध गतिविधियों की जड़ें काटी जा सकीं हैं या यह केवल सतही कार्रवाई बनकर रह जाएगी?
जिला प्रशासन और वन विभाग के लिए चुनौती यह है कि सिर्फ कार्रवाई दिखाना पर्याप्त नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा, जागरूकता और नेटवर्क पर नियंत्रण ही इस समस्या को जड़ से समाप्त कर सकता है।

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