
स्मृति शेष-सादगी और संस्कार की प्रतिमूर्ति बानुबाई सोलंकी: तीन पीढ़ियों की साक्षी
ALIRAJPUR: उदयगढ़-कानाकाकड़ के वरिष्ठ अध्यापक लोकेंद्र सिंह सोलंकी की माताजी श्रीमती बानुबाई सोलंकी की स्मृति में उनके गृह नगर कानाकाकड़ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। 14 जनवरी को अल्प बीमारी के बाद उनका निधन हुआ था। श्रद्धांजलि सभा में परिवारजनों, ग्रामवासियों और समाज के गणमान्य लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
● तीन पीढ़ियों को संस्कार देने वाली मातृशक्ति
85 वर्षीय स्वर्गीय बानुबाई सोलंकी अपने जीवनकाल में तीन पीढ़ियों की साक्षी रहीं। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, त्याग, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों से ओतप्रोत रहा। उन्होंने परिवार में शिक्षा, नैतिकता और सेवा भाव को सर्वोच्च स्थान दिया।
● शिक्षा को जीवन मूल्य बनाने वाला परिवार
श्रद्धांजलि सभा में बताया गया कि स्वर्गीय सोलंकी दंपत्ति की प्रेरणा और मार्गदर्शन से परिवार की तीन पीढ़ियां शिक्षित हुईं। आज परिवार में अध्यापक, प्राध्यापक, इंजीनियर, डॉक्टर, राज्य प्रशासनिक सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा तक के अधिकारी कार्यरत हैं। उपस्थित परिजनों और अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता के संस्कार, तपस्या और आशीर्वाद का प्रतिफल है।
● ग्राम समाज के लिए प्रेरणा
दिवंगत बानुबाई सोलंकी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे ग्राम समाज के लिए आदर्श रहीं। उन्होंने अपने आचरण से सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और नैतिकता, सद्भाव और अनुशासन का संदेश दिया। ग्रामवासियों ने उन्हें सरल जीवन और उच्च विचारों की प्रतिमूर्ति बताया।
● श्रद्धांजलि सभा में भावुक क्षण
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके मातृत्व, सेवा भाव और सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि उनके दिए संस्कार आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे।
● संस्कारों की विरासत
परिवार और समाज ने एक स्वर में कहा कि स्वर्गीय बानुबाई सोलंकी का जीवन मूल्य, शिक्षा और संस्कारों की वह विरासत है, जो पीढ़ियों तक जीवित रहेगी। श्रद्धांजलि सभा का समापन दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना के साथ हुआ।




