इंदौर जल त्रासदी: सरकार ने मानी 16 मौतें, हाईकोर्ट ने डेथ ऑडिट पर उठाए तीखे सवाल!

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Reconciliation Talks Will be Held With VC

इंदौर जल त्रासदी: सरकार ने मानी 16 मौतें, हाईकोर्ट ने डेथ ऑडिट पर उठाए तीखे सवाल!

वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट 

इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य सरकार पर गंभीर आपत्ति जताई और कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान सरकार ने स्वीकार किया कि अब तक के ऑडिट में कुल 23 मौतों का विश्लेषण किया गया है, जिनमें से 16 मौतों को दूषित पानी से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण मिले हैं, जबकि शेष मामलों में कारण स्पष्ट नहीं बताया गया।

याचिकाकर्ताओं और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में मृतकों की संख्या 28 तक पहुँच चुकी है, जिसमें कुछ मौतों को सीधे दूषित पानी से जोड़कर देखा जा रहा है। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान शासन की लचर रिपोर्टिंग और तथ्यों की अस्पष्टता पर गंभीर सवाल उठाए।

कोर्ट ने पूछा कि जिन मौतों को दूषित पानी से जोड़ा नहीं गया, उसके फैसले का आधार क्या है? वैज्ञानिक परीक्षण और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कहां हैं? बिना ठोस वैज्ञानिक सबूतों के मौतों के कारण कैसे निर्धारित किए गए? अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में सरकार सभी सम्बंधित रिपोर्ट, लैब परीक्षण और पोस्टमॉर्टम प्रमाण पेश करे।

पीड़ित पक्ष ने मृतक परिवारों को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग उठाई, जिसे अदालत विचाराधीन रखे हुए है। सुनवाई करीब ढाई घंटे तक चली। यह प्रकरण दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए एक व्यापक स्वास्थ्य संकट से जुड़ा है, जब भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण उल्टी–दस्त जैसे लक्षणों से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ी और कई की मौतें हुईं। हाईकोर्ट पहले भी प्रशासन को साफ पानी सुनिश्चित करने, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और प्रभावितों को मुफ्त उपचार मुहैया कराने के निर्देश दे चुका है।

अगली सुनवाई में विस्तृत वैज्ञानिक और प्रशासनिक रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और बेहतर मुआवजे की उम्मीद करते हैं।