
NEET छात्रा रेप-मौत केस में बड़ा मोड़: POCSO एक्ट की तैयारी, DNA जांच बनी जांच की धुरी
पटना: NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार छात्रा के नाबालिग होने की पुष्टि होने के बाद इस मामले में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह मामला अब केवल मौत नहीं, बल्कि रेप-मौत केस के रूप में देखा जा रहा है।
● नाबालिग होने की पुष्टि, POCSO एक्ट की तैयारी
जांच एजेंसियों को परिवार द्वारा सौंपे गए उम्र से जुड़े प्रमाण पत्रों के अनुसार पीड़िता नाबालिग थी। इसी आधार पर पुलिस अब POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है। यदि फॉरेंसिक रिपोर्ट और DNA मिलान में यौन शोषण की पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर कड़ी धाराएं लागू होंगी।
● अंडरगारमेंट में मिले स्पर्म से बदली जांच की दिशा
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच में छात्रा के अंडरगारमेंट में पुरुष स्पर्म मिलने के बाद मामला गंभीर हो गया। इसी साक्ष्य ने यौन उत्पीड़न की आशंका को मजबूत किया और जांच को DNA मिलान की दिशा में मोड़ दिया।
● हॉस्टल से जुड़े 6 संदिग्धों के DNA सैंपल
विशेष जांच टीम ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े 6 संदिग्ध युवकों के DNA सैंपल लिए हैं। यह सैंपल मजिस्ट्रेट और मेडिकल टीम की मौजूदगी में पटना के गर्दनीबाग अस्पताल में लिए गए। पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे चली और सभी सैंपल सील कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
● क्यों लिए गए इन संदिग्धों के सैंपल
SIT के अनुसार इन संदिग्धों को घटना से पहले और बाद में हॉस्टल के आसपास देखा गया था। CCTV फुटेज में इनकी मौजूदगी दर्ज है।
कुछ संदिग्धों की मोबाइल लोकेशन घटना के समय हॉस्टल क्षेत्र में मिली। हॉस्टल स्टाफ के बयानों में भी इनकी पहचान सामने आई।
एक संदिग्ध की हॉस्टल स्टाफ से नजदीकी और बिना रोक-टोक परिसर में आवाजाही की जानकारी भी जांच में सामने आई है। इन तथ्यों के आधार पर DNA सैंपल लेना जरूरी माना गया।
● घटना वाले दिन हॉस्टल में दाखिल होने के संकेत
जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन एक संदिग्ध हॉस्टल परिसर में दाखिल हुआ था। हालांकि रजिस्टर में उसकी एंट्री नहीं मिली, लेकिन CCTV फुटेज में उसकी मूवमेंट साफ दिखाई दी है। वह पीड़िता के फ्लोर के पास भी नजर आया, जिससे शक और गहरा गया।
● परिवार के सदस्यों के DNA सैंपल क्यों लिए गए
जांच को वैज्ञानिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए पीड़िता के परिवार के कई सदस्यों के DNA सैंपल भी लिए गए हैं।
मां का DNA सैंपल इसलिए लिया गया ताकि पीड़िता की फैमिली रेफरेंस प्रोफाइल तैयार की जा सके और किसी भी कन्फ्यूजन की स्थिति में पहचान पूरी तरह स्पष्ट रहे।
पिता का DNA सैंपल पीड़िता की जेनेटिक प्रोफाइल को कन्फर्म करने के लिए लिया गया है, ताकि घटनास्थल और कपड़ों से मिले जैविक साक्ष्यों का सटीक मिलान किया जा सके।
भाई का DNA सैंपल पारिवारिक DNA स्ट्रक्चर को और मजबूत करने के लिए लिया गया है, जिससे फॉरेंसिक रिपोर्ट पर कोई तकनीकी सवाल न उठ सके।
दो मामा- मातृ पक्ष की जेनेटिक लाइन की पुष्टि के लिए दोनों मामाओं के DNA सैंपल लिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच रिपोर्ट अदालत में पूरी तरह वैज्ञानिक और निर्विवाद रहे।
● DNA मिलान से खुलेगा सच
अब फॉरेंसिक लैब में छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के DNA का मिलान संदिग्धों और पारिवारिक रेफरेंस सैंपल से किया जाएगा। जांच एजेंसियों का मानना है कि DNA रिपोर्ट इस केस में सबसे निर्णायक सबूत साबित हो सकती है।
● SIT कई कोणों से जांच में जुटी
फिलहाल SIT CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, हॉस्टल स्टाफ के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। मामला अब सिर्फ मौत की जांच नहीं रह गया है, बल्कि नाबालिग की सुरक्षा, यौन अपराध और संस्थागत लापरवाही जैसे गंभीर सवालों से जुड़ गया है।
इस केस में आने वाले दिनों में DNA रिपोर्ट और POCSO एक्ट की कार्रवाई तय करेगी कि दोषियों तक कानून कैसे पहुंचता है।





